गायत्री मंत्र के बारे में जानकारी


मंत्र क्या है

मंत्र शब्दों का संचय होता है, जिससे हम अपने इष्ट को प्राप्त कर सकते हैं और अनिष्ट बाधाओं को नष्ट कर सकते हैं। मंत्र इस शब्द में ‘मन्’ का तात्पर्य मन और मनन से है और ‘त्र’ का तात्पर्य शक्ति और रक्षा से है। मंत्रजप के अनेक लाभ होते हैं जैसे  उदा. आध्यात्मिक प्रगति, शत्रु का विनाश, अलौकिक शक्ति पाना, पाप नष्ट होना और वाणी की शुद्धि।

मंत्रजा और नाम जपने में भिन्नता

मंत्र जपने और ईश्वर का नाम जपने में बहुत भिन्नता है। मंत्रजप करने के लिए अनेक नियमों का पालन करना पडता है; परंतु नामजप करने के लिए इसकी आवश्यकता नहीं होती है। उदाहरणार्थ मंत्रजप सात्त्विक वातावरण में ही करना आवश्यक है; परंतु ईश्वर का नामजप कहीं भी और किसी भी समय किया जा सकता है।

मंत्रजप से जो आध्यात्मिक ऊर्जा उत्पन्न होती है उसका विनियोग अच्छे अथवा बुरे कार्य के लिए किया जा सकता है। यह धन कमाने समान है; धन का उपयोग किस प्रकार से करना है, यह धन कमाने वाले व्यक्ति पर निर्भर करता है।

गायत्री मंत्र का पूर्णअर्थ

मंत्र के प्रत्येक शब्द की व्याख्या गायत्री मंत्र के पहले नौं शब्द प्रभु के गुणों की व्याख्या करते हैं

ॐ = प्रणव
भूर = मनुष्य को प्राण प्रदाण करने वाले
भुवः = दुख़ों का नाश करने वाले
स्वः = सुख़ प्रदान करने वाले
तत = वह,
सवितुर = सूर्य की भांति उज्जवल
वरेण्यं = सबसे उत्तम
भर्गो = कर्मों का उद्धार करने वाले
देवस्य = प्रभू
धीमहि = आत्म चिंतन के योग्य (ध्यान)
धियो = बुद्धि,
यो = जो,
नः = हमारी,
प्रचोदयात् = हमें शक्तिदें

गायत्री मंत्र का उचारण कब ज़रूरी है

सुबह उठते वक़्त 8 बार,
अष्ट कर्मों को जीतने के लिए l

भोजन के समय 1 बार
अमृत समान भोजन प्राप्त होने के लिए l

बाहर जाते समय 3 बार
समृद्धि सफलता और सिद्धि के लिए l

मन्दिर में 12 बार
प्रभु के गुणों को याद करने के लिए l

छींक आए तब गायत्री मंत्र उच्चारण 1 बार
अमंगल दूर करने के लिए l

सोते समय 7 बार
सात प्रकार के भय दूर करने के लिए l

ओउम् तीन अक्षरों से बना है|
अ+उ+म्..
*”अ”* का अर्थ है उत्पन्न होना,

*”उ”* का तात्पर्य है उठना, उड़ना अर्थात् विकास,

*”म”* का मतलब है मौन हो जाना अर्थात् “ब्रह्मलीन” हो जाना।

ॐ सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति और पूरी सृष्टि का द्योतक है।

ॐ का उच्चारण शारीरिक लाभ प्रदान करता है।

जानीए कैसे


सुनील कुमार

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