भारत ने कब और किस-किस से लड़े युद्धों की जानकारी


यहां पर हम आपको भारत की आजादी के बाद हुए प्रमुख युद्ध कब और किसके बीच हुए की जानकारी  बताने जा रहे है। और इतिहास की परीक्षा में प्रमुख युद्धों के नाम, कब और किसके बीच हुए के आधार पर ज्यादातर प्रश्न पूछे जाते है, इसलिए यह पोस्ट आपकी सभी प्रकार की परीक्षा की तैयारी के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। आइये जाने भारत की आजादी के बाद हुए प्रमुख युद्ध के नाम, कब और किसके बीच हुए के बारे में

15 अगस्त 1947 को हमारा देश आजाद हुआ. भारत का बंटवारा हुआ और उसमे से कई देश और राज्य बने जिनमे से एक देश पाकिस्तान बना. भारत पाकिस्तान बंटवारे के समय भयंकर सांप्रदायिक दंगे हुए जिनमें लाखों लोगों की जानें गई. भारत इससे उबरने की कोशिश करता हुआ एक नई राह की तरफ बढ़ रहा था. पर पाकिस्तान आपने नापाक इरादों के साथ आजादी के दो महीने बाद ही जम्मू कश्मीर पर हमला कर दिया. भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ ये पहला युद्ध था|

प्रथम युद्ध 22 अक्टूबर 1947

भारत पाकिस्तान युद्ध को पहले कश्मीर युद्ध (First Kashmir War)  के रूप में जाना जाता है. यह युद्ध भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर और जम्मू रियासत के लिए लड़ा गया था. स्वतंत्रता के कुछ ही हफ्तों के बाद पाकिस्तान ने कश्मीर को हथियाने का प्रयास किया और इसके लिए वजीरिस्तान के आदिवासी कबायली लश्कर को लाइन ऑफ़ कण्ट्रोल पार कराया।

भारत के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु ने यूनाइटेड नेशन को हस्तक्षेप करने को कहा और संयुक्त राष्ट्र ने संघर्ष विराम के लिए  दिसंबर-31-1948 का दिन तय किया। 13 अगस्त, 1948 को संयुक्त राष्ट्र ने प्रस्ताव पारित किया और 1 जनवरी 1949 को युद्धविराम की घोषणा हो गई। और जो सेनाएं जिस क्षेत्र में थीं, उसे युद्ध विराम रेखा मान लिया गया था| भारत की सेनाएं और आगे बढ़ रही थीं कि युद्ध विराम की घोषणा हो गई और जम्मू-कश्मीर का कुछ भाग पाकिस्तान के कब्जे में चला गया| इस संघर्ष विराम की शर्तो के मुताबिक पाकिस्तान को अपनी दोनों सेनाएं नियमित और अनियमित (नियमित – पाकिस्तानी आर्मी और अनियमित – आदिवासी काबिले वाली सेना) को युद्ध की जगह से हटाने को कहा और भारत को कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्य में अपने बलों की कम से कम शक्ति बनाए रखने के लिए अनुमति दी गई ।

उस समय जो सीजफायर लाइन थी वही बाद में लाइन आफ कंट्रोल बन गई और यहीं से शुरु हुई कश्मीर को लेकर भारत-पाकिस्तान के बीच कभी न खत्म होने वाली जंग अब तक दोनों देशों के बीच 4 युद्द हो चुके हैं लेकिन नतीजा कुछ भी नहीं निकला है

दूसरा युद्ध 20 अक्टूबर, 1962

भारत-चीन युद्ध जो भारत चीन सीमा विवाद के रूप में भी जाना जाता है भारत-चीन युद्ध 20 अक्टूबर, 1962 को लड़ा गया था दोनों देशों के बीच ये युद्ध क़रीब एक महीने तक चला जिसमें भारत को काफ़ी हानि उठानी पड़ी और उसकी हार हुई। इस युद्ध में भारत ने अपनी वायुसेना का इस्तेमाल नहीं किया था, जिसके लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की कड़ी आलोचना भी हुई। भारत-चीन युद्ध कठोर परिस्थितियों में हुई लड़ाई के लिए भी उल्लेखनीय है, चीनी सेना ने 20 अक्टूबर 1962 को लद्दाख में और मैकमोहन रेखा के पार एक साथ हमले शुरू किये। चीनी सेना दोनों मोर्चे में भारतीय बलों पर उन्नत साबित हुई और पश्चिमी क्षेत्र में चुशूल में रेजांग-ला एवं पूर्व में तवांग पर कब्ज़ा कर लिया। जब चीन ने 20 नवम्बर 1962 को युद्ध विराम और साथ ही विवादित क्षेत्र से अपनी वापसी की घोषणा की तब युद्ध खत्म हो गया।

शहीद तथा गिरफ्तार सैनिकों की संख्या 

इस युद्ध में 1383 भारतीय सैनिक मारे गए, जबकि 1047 घायल हुए थे। इतना ही नहीं क़रीब 1700 सैनिक लापता हो गए और 3968 सैनिकों को चीन ने गिरफ्तार कर लिया। वहीं दूसरी ओर चीन के कुल 722 सैनिक मारे गए और 1697 घायल हुए थे। इस युद्ध की सबसे बड़ी बात यह भी थी कि भारत की तरफ़ से मात्र बारह हज़ार भारतीय सैनिक चीन के 80 हज़ार सैनिकों का मुकाबला कर रहे थे। दोनों सेनाओं के मध्य यह एक बहुत बड़ा अंतर था।

तीसरा युद्ध अप्रैल 1965

1962 में चीन के साथ हुए युद्ध की हार से भारत अभी उबर रहा था और पाकिस्तान ने प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को कमजोर मानते हुए अपनी शक्ति को ज्यादा आंका। पाकिस्तान ने समझा कि शास्त्री युद्ध को झेलने में असमर्थ होंगे और भारत अशक्त है और सामना नहीं कर सकेगा और इस युद्ध का सामना नहीं कर पाएगा|

भारत- पाकिस्तान युद्ध उन मुठभेड़ों का नाम है जो दोनों देशों के बीच अप्रैल 1965 से सितम्बर 1965 के बीच हुई थी। इसे कश्मीर के दूसरे युद्ध के नाम से भी जाना जाता है। भारत और पाकिस्तान के बीच जम्मू और कश्मीर राज्य पर अधिकार के लिये बँटवारे के समय से ही विवाद चल रहा है। 1947 में भारत-पाकिस्तान के बीच प्रथम युद्ध भी कश्मीर के लिये ही हुआ था। इस लड़ाई की शुरूआत पाकिस्तान ने अपने सैनिकों को घुसपैठियों के रूप मे भेज कर इस उम्मीद मे की थी कि कश्मीर की जनता भारत के खिलाफ विद्रोह कर देगी लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ|

तीन महीनो तक चली भीषण लड़ाई के बाद दोनों देश संयुक्त राष्ट्र प्रायोजित युद्धविराम पर सहमत हो गए। भारतीय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और अयूब ख़ान के बीच ताशकंद में बैठक हुई जिसमें एक घोषणापत्र पर दोनों ने दस्तख़त किए। इसके तहत दोनों नेताओं ने सारे द्विपक्षीय मसले शांतिपूर्ण तरीके से हल करने का संकल्प लिया। दोनों नेता अपनी-अपनी सेना को अगस्त, 1965 से पहले की सीमा पर वापस बुलाने पर सहमत हो गए।

चोथा युद्ध 3 दिसंबर 1971 

भारत- पाकिस्तान के बीच हुआ 1971 का युद्ध स्वतंत्र भारत के इतिहास में हमेशा अमर रहेगा। इसका एक पहलू यह भी था की भारत ने 1971 का युद्ध लड़ा बांग्लादेश को एक अलग देश का दर्जा दिलाने के लिए। 14 दिन तक युद्ध के बाद पाकिस्तानी सेना ने ढाका में आत्मसमर्पण कर दिया। पाकिस्तान ने 16 दिसंबर को समर्पण किया था। इसलिए इस दिन को भारतीय सेना के शौर्य के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। युद्ध समाप्त होते ही भारत ने नवघोषित बांग्लादेश का शासन वहां के जन नेताओं को सौंप दिया।

1971 का ये युद्ध 14 दिन चला। 3 दिसंबर 1971 को शुरू हुआ ये युद्ध 16 दिसंबर को खत्म हुआ। इस युद्ध में भारतीय सेना के करीब 4000 सैनिक शहीद हुए। सीकर जिले के 48 सैनिक इस युद्ध में शहीद हुए।  इस युद्ध में करीब 10 हजार सैनिक घायल हुए। और पाकिस्तान के 9300  सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया ।  16 दिसंबर को शाम 4 बजकर 31 मिनट पर समर्पण के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर हुए ।

पांचवा युद्ध 8 मई 1999

कारगिल युद्ध भारत और पाकिस्तान के बीच 8 मई से 14 जुलाई 1999 के बीच कश्मीर के करगिल जिले में हुए सशस्त्र संघर्ष का नाम है।

पाकिस्तान की सेना और कश्मीरी उग्रवादियों ने भारत और पाकिस्तान के बीच की नियंत्रण रेखा को पार करके भारत की ज़मीन पर कब्ज़ा करने की कोशिश की थी । पाकिस्तान ने दावा किया कि लड़ने वाले सभी कश्मीरी उग्रवादी थें, लेकिन युद्ध में बरामद हुए दस्तावेज़ों और पाकिस्तानी नेताओं के बयानों से साबित हुआ कि पाकिस्तान की सेना प्रत्यक्ष रूप में इस युद्ध में शामिल थी। लगभग 30,000 पाकिस्तानी सैनिक और करीब 5,000 घुसपैठिए इस युद्ध में शामिल थे। भारतीय सेना और वायुसेना ने पाकिस्तान के कब्ज़े वाली जगहों पर हमला किया और धीरे-धीरे पाकिस्तान को सीमा पार वापिस जाने पर मजबूर किया। परमाणु बम बनाने के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ यह पहला सशस्त्र संघर्ष था। जिसमे हिंदुस्तान की विजय हुई|

14 जुलाई 1999 को दोनो देशों ने कारगिल पर अपनी कार्यवाही रोक दी थी। इसके बाद 26 जुलाई को भारत और पाकिस्तान के बीच समझौता हुआ था।

भारत विभाजन के सात दशक बाद भी इस विभाजन का उद्देश्य अधूरा है. माना गया था कि अपने लिये अलग राष्ट्र की इच्छा रखनेवाले मुसलमानों की मुराद पूरी हो जायेगी, तो आशंकाओं के धुंध छंट जाएंगे, दोनों देश शांति के साथ विकास के पथ पर अग्रसर होंगे. दोनों देशों के पहले सत्ता-प्रमुखों- पंडित जवाहर लाल नेहरू और मोहम्मद अली जिन्ना- की घोषित आकांक्षाएं यही थीं|


सुनील कुमार

Back to top