भारत की सभी प्रमुख नदियां


भारत की नदियों को देश के आर्थिक एवं सांस्कृतिक विकास में प्राचीनकाल से ही महत्वपूर्ण योगदान रहा है। सिन्धु तथा गंगा नदियों की घाटियों में ही विश्व की सर्वाधिक प्राचीन सभ्यताओं का विकाश हुआ जैसे सिन्धु घाटी तथा आर्य सभ्यता का आर्विभाव हुआ। प्राचीन काल में व्यापारिक एवं यातायात की सुविधा न होने के कारण देश में व्यपार नदियों के सहारे ही होता था| जिसकी वजहाँ से अधिकांश नगर नदियों के किनारे ही विकसित हुए थे| आज भी देश की सर्वाधिक जनसंख्या एवं कृषि का संकेन्द्रण नदी घाटी क्षेत्रों में पाया जाता है। तथा आज भी देश के लगभग सभी धार्मिक स्थल किसी न किसी नदी से सम्बद्ध रखते है।

जानिए भारत की प्रमुख नदियों के बारे में

गंगा:- भारत की सबसे महत्त्वपूर्ण नदी गंगा जो भारत और बांग्लादेश में मिलाकर २,५१० किलोमीटर की दूरी तय करती हुई उत्तराखण्ड में हिमालय से लेकर बंगाल की खाड़ी के सुन्दरवन तक विशाल भू-भाग को सींचती है। देश की प्राकृतिक सम्पदा ही नहीं, जन-जन की भावनात्मक आस्था का आधार भी है। भारत की अनेक धार्मिक अवधारणाओं में गंगा नदी को देवी के रूप में निरुपित किया गया है। बहुत से पवित्र तीर्थस्थल गंगा नदी के किनारे पर बसे हुए हैं, जिनमें वाराणसी और हरिद्वार सबसे प्रमुख हैं। गंगा नदी को भारत की नदियों में सबसे पवित्र माना जाता है एवम् यह मान्यता है कि गंगा में स्नान करने से मनुष्य के सारे पापों का नाश हो जाता है। मरने के बाद लोग गंगा में राख विसर्जित करना मोक्ष प्राप्ति के लिए आवश्यक समझते हैं, यहाँ तक कि कुछ लोग गंगा के किनारे ही प्राण विसर्जन या अंतिम संस्कार की इच्छा भी रखते हैं।

यमुना:- यमुना भारत की एक नदी है। यह गंगा नदी की सबसे बड़ी सहायक नदी है जो यह यमुनोत्री नामक जगह से निकलती है और प्रयाग (इलाहाबाद) में गंगा से मिल जाती है। भारतवर्ष की सर्वाधिक पवित्र और प्राचीन नदियों में यमुना की गणना गंगा के साथ की जाती है। यमुना और गंगा के दो आब की पुण्यभूमि में ही आर्यों की पुरातन संस्कृति का गौरवशाली रूप बन सका था। धार्मिक रूप से भुवनभास्कर सूर्य इसके पिता, मृत्यु के देवता यम इसके भाई और भगवान श्री कृष्ण इसके परि स्वीकार्य किये गये हैं। जहाँ भगवान श्री कृष्ण ब्रज संस्कृति के जनक कहे जाते हैं, वहाँ यमुना इसकी जननी मानी जाती है। इस प्रकार यह सच्चे अर्थों में ब्रजवासियों की माता है। अतः ब्रज में इसे यमुना मैया कहते है।

सरस्वती:- सरस्वती एक पौराणिक नदी जिसकी चर्चा वेदों में भी है। ऋग्वेद (२ ४१ १६-१८) में सरस्वती का अन्नवती तथा उदकवती के रूप में वर्णन आया है। यह नदी सर्वदा जल से भरी रहती थी और इसके किनारे अन्न की प्रचुर उत्पत्ति होती थी। कहते हैं, यह नदी पंजाब में सिरमूरराज्य के पर्वतीय भाग से निकलकर अंबाला तथा कुरुक्षेत्र होती हुई कर्नाल जिला और पटियाला राज्य में प्रविष्ट होकर सिरसा जिले की दृशद्वती (कांगार) नदी में मिल गई थी। सरस्वती नदी के तट पर बसी सभ्यता को जिसे हड़प्पा सभ्यता या सिन्धु-सरस्वती सभ्यता भी कहा जाता है|

कालिंदी:- कालिंदी भारत की प्रमुख नदियों में से एक यमुना का ही दूसरा नाम है। कलिंद नामक पर्वत से निकलने के कारण ही यमुना को ‘कालिंदी’ भी कहा जाता है। भारत के उत्तर में हिमालय पर्वत है। इसकी एक चोटी का नाम ‘बन्दरपुच्छ’ है। यह चोटी उत्तराखंड के टिहरी-गढ़वाल ज़िले में है। यह चोटी बहुत ऊंची है। इसकी ऊँचाई लगभग 20,731 फुट है। इसे ‘सुमेरु’ भी कहते हैं। इसके एक भाग का नाम ‘कलिंद’ है। यहीं से यमुना निकलती है। इसी से यमुना का नाम ‘कलिंदजा’ और ‘कालिंदी’ भी है। दोनों का अर्थ “कलिंद की बेटी” होता है।

कावेरी:- कावेरी कर्नाटक तथा उत्तरी तमिलनाडु में बहनेवाली एक सदानीरा नदी है। यह पश्चिमी घाट के पर्वत ब्रह्मगिरी से निकली है। इसकी लम्बाई प्रायः 800 किलोमीटर है। दक्षिण पूर्व में प्रवाहित होकर कावेरी नदी बंगाल की खाड़ी में मिली है। सिमसा, हिमावती,भवानी इसकी उपनदियाँ है।

रामगंगा:- रामगंगा नदी भारत की प्रमुख तथा पवित्र नदियों में से एक हैं। स्कंदपुराण के मानसखण्ड में इसका उल्लेख रथवाहिनी के नाम से हुआ है।रामगंगा 154 किलोमीटर की पहाड़ी यात्रा करके कालागढ़ ज़िले के निकट बिजनौर ज़िले के मैदानों में उतरती है तथा 24 किलोमीटर की मैदानी भागों की यात्रा करने के उपरान्त इसमें कोह नदी आकर मिलती है।

कोसी:- कोसी नदी नेपाल में हिमालय से निकलती है और बिहार में भीम नगर के रास्ते से भारत में दाखिल होती है। इसमें आने वाली बाढ से बिहार में बहुत तबाही होती है जिससे इस नदी को ‘बिहार का अभिशाप’ भी कहा जाता है।

गगास नदी:- गगास नदी रामगंगा नदी की एक सहायक नदी है, मानसखण्ड में इसका उल्लेख गार्गी के नाम से हुआ है। यह उत्तराखण्ड के हिमालयी पर्वत श्रृंखलाओं के कुमांऊँ क्षेत्र के अन्तर्गत अल्मोड़ा जिले के द्रोणागिरी, नागार्जुन इत्यादि पर्वतों के विभिन्न प्राकृतिक जलस्रतों के संगमोंं से बनती है। अनन्तत: भिकियासैंण नामक तहसील पर रामगंगा नदी में मिल जाती है|

विनोद नदी:- विनोद नदी रामगंगा नदी की एक सहायक नदी है, जिसे कुमांऊँनी बोली में विनौ भी कहा जाता है। यह उत्तराखण्ड राज्य के हिमालय पर्वत के कुमांऊँ और गढ़वाल क्षेत्र की पर्वत श्रंखलाओं से निकलकर पौराणिक बृद्धकेदार के निकट रामगंगा नदी में मिलती है|Indian rivers

कृष्णा:- कृष्णा भारत में बहनेवाली एक नदी है। यह पश्चिमी घाट के पर्वत महाबलेश्वर से निकलती है। इसकी लम्बाई प्रायः 1290 किलोमीटर है। यह दक्षिण-पूर्व में बहती हुई बंगाल की खाड़ी में जाकर गिरती है। इसका डेल्टा भारत के सबसे उपजाऊ क्षेत्रों में से एक है। यह मिट्टी का कटाव करने के कारण पर्यावरण को बहुत नुकसान पहुचांती है।

गोदावरी:- गोदावरी दक्षिण भारत की एक प्रमुख नदी है| यह नदी दूसरी प्रायद्वीपीय नदियों में से सबसे बड़ी नदी है। इसे दक्षिण गंगा भी कहा जाता है। इसकी उत्पत्ति पश्चिमघाट की पर्वत श्रेणी के अन्तर्गत त्रिम्बक पर्वत से हुई है। यह महाराष्ट्र में नासिक जिले से निकलती है।

गंडक:- गंडक बिहार और नेपाल में बहने वाली एक नदी का नाम है। इस नदी को नेपाल मे सालिग्रामि और मैदान मे नारायनी कहते है यह पटना के निकट गंगा मे मिल जाती है। इस नदी की लम्बाई लगभग १३१० किलोमीटर होगी।

घाघरा:- घाघरा (गोगरा या करनाली) उत्तरी भारत में बहनेवाली एक नदी है। यह गंगा नदी की प्रमुख सहायक नदी है।  यह दक्षिणी तिब्बत के ऊंचे पर्वत शिखरों (हिमालय) से निकलती है जहाँ इसका नाम कर्णाली है। इसके बाद यह नेपाल से होकर बहती हुई भारत के उत्तर प्रदेश एवं बिहार में प्रवाहित होती है।

चम्बल:- चंबल नदी मध्य भारत में यमुना नदी की सहायक नदी है। यह नदी “जानापाव पर्वत ” समहू से निकलती है। इसका प्राचीन नाम “चरमवाती ” है। इसकी सहायक नदिया शिप्रा, सिंध, कलिसिन्ध, ओर कुननों नदी है। यह नदी भारत में उत्तर तथा उत्तर-मध्य भाग में राजस्थान तथा मध्य प्रदेश के धार,उज्जैन,रतलाम, मन्दसौर भीँड मुरैनाआदि जिलो से होकर बहती है।

चेनाब:- चिनाब नदी या चंद्रभागा नदी भारत के हिमाचल प्रदेश के लाहौल एवं स्पीति जिला में दो नदियों चंद्र नदी एवं भागा नदी के संगम से बनी है। यह आगे जम्मू व कश्मीर से होते हुए पाकिस्तान में सिंधु नदी से जाकर मिलती है।

झेलम:- झेलम उत्तरी भारत में बहनेवाली एक नदी है। वितस्ता झेलम नदी का वास्तविक नाम है। कश्मीरी भाषा में इसे व्यथ कहते हैं। इसका उद्भव वेरीनाग नामी नगर में है।

दामोदर:- दामोदर पश्चिम बंगाल तथा झारखंड में बहने वाली एक नदी है। इस नदी के जल से एक महत्वाकांक्षी पनबिजली परियोजना दामोदर घाटी परियोजना चलाई जाती है जिसका नियंत्रण डी वी सी करती है। दामोदर नदी झारखण्ड के छोटा नागपुर क्षेत्र से निकलकर पश्चिमी बंगाल में पहुँचती है। हुगली नदी के समुद्र में गिरने के पूर्व यह उससे मिलती है।

नर्मदा:- नर्मदा, जिसे रेवा के नाम से भी जाना जाता है, मध्य भारत की एक नदी और भारतीय उपमहाद्वीप की पांचवीं सबसे लंबी नदी है। यह गोदावरी नदी और कृष्णा नदी के बाद भारत के अंदर बहने वाली तीसरी सबसे लंबी नदी है। मध्य प्रदेश राज्य में इसके विशाल योगदान के कारण इसे “मध्य प्रदेश की जीवन रेखा” भी कहा जाता है।

ताप्ती:- ताप्ती पश्चिमी भारत की प्रसिद्ध नदी है। यह मध्य प्रदेश राज्य के बैतूल जिले के मुलताई से निकलकर सतपुड़ा पर्वतप्रक्षेपों के मध्य से पश्चिम की ओर बहती हुई महाराष्ट्र के खानदेश के पठार एवं सूरत के मैदान को पार करती और अरब सागर में गिरती है।

बेतवा:- बेतवा भारत के मध्य प्रदेश राज्य में बहने वाली एक नदी है। यह यमुना की सहायक नदी है। यह मध्य-प्रदेश में भोपाल से निकलकर उत्तर-पूर्वी दिशा में बहती हुई भोपाल, विदिशा, झाँसी, ललितपुर आदि जिलों में होकर बहती है।

पद्मा:- पद्मा एक नदी है जो बांग्लादेश में गंगा की मुख्य धारा है। अर्थात् गंगा नदी बांग्लादेश में प्रवेश करते ही ‘पद्मा’ के नाम से जानी जाती है। राजमहल से ३० किमी पूर्व में गंगा की एक शाखा निकलकर मुर्शिदाबाद, बहरमपुर, नदिया, हुगली और कलकत्ता होती हुई पश्चिम-दक्षिण की ओर बंगाल की खाड़ी में गिर जाती है, जो ‘भागीरथी’ शाखा के नाम से प्रसिद्ध है।

फल्गू:- फल्गु नदी झारखण्ड के पलामू जिला से निकली है यह नदी कोई अन नदी मे नहीं मिला है फल्गु नदी जेहानाबाद जिला मे जा कर समाप्त हो जाती है यह नदी बिहार मे मथाम्पूर्ण नदी मन ज्जता है|

बागमती:- बागमती नेपाल और भारत की एक बहुत महत्त्वपूर्ण नदी है। इस नदी के तट पर काठमांडू अवस्थित है। नेपाल का सबसे पवित्र तीर्थ स्थल पशुपतिनाथ मंदिर भी इसी नदी के तट पर अवस्थित है। इस नदी का उद्गम स्थान बागद्वार है। काटमाण्डौ के टेकु दोभान मै विष्णुमति नदी इसमें समाहित होती है।

ब्रह्मपुत्र:- ब्रह्मपुत्र एक नदी है। यह तिब्बत, भारत तथा बांग्लादेश से होकर बहती है। ब्रह्मपुत्र का उद्गम तिब्बत के दक्षिण में मानसरोवर के निकट चेमायुंग दुंग नामक हिमवाह से हुआ है। इसकी लंबाई लगभग 2700 किलोमीटर है। इसका नाम तिब्बत में सांपो, अरुणाचल में डिहं तथा असम में ब्रह्मपुत्र है। यह नदी बांग्लादेश की सीमा में जमुना के नाम से दक्षिण में बहती हुई गंगा की मूल शाखा पद्मा के साथ मिलकर बंगाल की खाड़ी में जाकर मिलती है।

भागीरथी:- भागीरथी भारत की एक नदी है। यह उत्तराखंड में से बहती है और देवप्रयाग में अलकनंदा से मिलकर गंगा नदी का निर्माण करती है। भागीरथी गोमुख स्थान से २५ कि॰मी॰ लम्बे गंगोत्री हिमनद से निकलती है। भागीरथी व अलकनन्दा देव प्रयाग संगम करती है जिसके पश्चात वह गंगा के रूप में पहचानी जाती है।

महानदी:- महानदी छत्तीसगढ़ तथा उड़ीसा अंचल की सबसे बड़ी नदी है। प्राचीनकाल में महानदी का नाम चित्रोत्पला[क] था। महानन्दा एवं नीलोत्पला भी महानदी के ही नाम हैं। महानदी का उद्गम रायपुर के समीप धमतरी जिले में स्थित सिहावा नामक पर्वत श्रेणी से हुआ है। महानदी का प्रवाह दक्षिण से उत्तर की तरफ है। सिहावा से निकलकर राजिम में यह जब पैरी और सोढुल नदियों के जल को ग्रहण करती है तब तक विशाल रूप धारण कर चुकी होती है।

महानंदा:- महानंदा नदी यह गंगा के बाये तट की प्रमुख सहायक नदी है। हिमालय से निकलने वाली गंगा की अंतिम सहायक नदी है।

रावी:- रावी उत्तरी भारत में बहनेवाली एक नदी है। इसका पौराणिक नाम परुष्णी है। रावी नदी हिमाचल प्रदेश के कांगडा जिले में रोहतांग दर्रे से निकल कर हिमाचल प्रदेश, जम्‍मू कश्‍मीर तथा पाकिस्तान से बहती हुयी झांग जिले की सीमा पर चिनाव नदी में मिल जाती हैं।

व्यास:- ब्यास पंजाब (भारत) हिमाचल में बहने वाली एक प्रमुख नदी है। नदी की लम्बाई 470 किलोमीटर है। पंजाब (भारत) की पांच प्रमुख नदियों में से एक है। ब्यास नदी का पुराना नाम ‘अर्जिकिया’ या ‘विपाशा’ था। यह कुल्लू में व्यास कुंड से निकलती है।

सतलुज:- सतलुज उत्तरी भारत में बहनेवाली एक सदानीरा नदी है। इसका पौराणिक नाम शतद्रु है। जिसकी लम्बाई पंजाब में बहने वाली पाँचों नदियों में सबसे अधिक है। यह पाकिस्तान में होकर बहती है।

सरयू:- सरयू नदी को अलग-अलग राज्यों में अन्य नाम घाघरा, सरजू, शारदा से भी जाना जाता है| हिमालय से निकलकर उत्तरी भारत के गंगा मैदान में बहने वाली नदी है जो बलिया और छपरा के बीच में गंगा में मिल जाती है। अपने ऊपरी भाग में, जहाँ इसे काली नदी के नाम से जाना जाता है, यह काफ़ी दूरी तक भारत (उत्तराखण्ड राज्य) और नेपाल के बीच सीमा बनाती है।

सिन्धु नदी:- सिन्धु नदी एशिया की सबसे लंबी नदियों में से एक है। यह पाकिस्तान, भारत (जम्मू और कश्मीर) और चीन (पश्चिमी तिब्बत) के माध्यम से बहती है। सिन्धु नदी का उद्गम स्थल, तिब्बत के मानसरोवर के निकट सिन-का-बाब नामक जलधारा माना जाता है। इस नदी की लंबाई प्रायः 2880 किलोमीटर है। यहां से यह नदी तिब्बत और कश्मीर के बीच बहती है।

सुवर्णरेखा:- सुवर्णरेखा या स्वर्णरेखा भारत के झारखंड प्रदेश में बहने वाली एक पहाड़ी नदी है। यह राँची नगर से 16 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित नगड़ी गाँव में रानी चुआं नामक स्थान से निकलती है और उत्तर पूर्व की ओर बढ़ती हुई मुख्य पठार को छोड़कर प्रपात के रूप में गिरती है। इस प्रपात (झरना) को हुन्डरु जलप्रपात (hundrughagh) कहते हैं।

हुगली:- हुगली भारत की एक नदी है। हुगली एक काफी गहरी नदी है या सबसे बड़ी गहराई वाली नदी है, इसकी औसत गहराई 108 फीट (32 मीटर) और अधिकतम गहराई है 381 फीट (117 मीटर) है। यह दूर की गहराई 95 फीट (29 मीटर) है। बैली में, हावड़ा, यह अधिकतम गहराई 147 फीट (46 मीटर) है। बैरकपुर और सेरामपूर में, यह अधिकतम गहराई 300 फीट (90 मीटर) है।

भारत की अन्य सहायक नदियाँ

अलकनन्दा नदी, इंद्रावती नदी, काली नदी, केन नदी, कोशी नदी, क्षिप्रा नदी, खड़कई नदी, गोमती नदी, टोंस नदी, तवा नदी, तुंगभद्रा नदी, पार्वती नदी, पुनपुन नदी, पेन्नार नदी, बनास नदी, बराकर नदी, बाणगंगा नदी, बैगाई नदी, बैगुल नदी, बकुलाही नदी, भीमा नदी, माही नदी, मूठा नदी, मुला नदी, मूसी नदी, लखनदेई नदी, लाछुंग नदी, लूनी नदी, शारदा नदी, शिप्रा नदी, साबरमती नदी, सोन नदी, टिस्टा नदी, सई नदी|


सुनील कुमार

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