जाने गोंद के प्राकृतिक गुणों के बारे में और इससे होने वाले लाभ


प्राकृति ने हमे बहुत सी सुन्दर वस्तुएं देती है, जिसमे से एक है पेड़, हर एक पेड़ की अपनी एक खासियत और गुण होते है, आज हम पेड़ की नहीं बल्कि पेड़ से निकलने वाली गोंद के बारे में बात करने जा रहे है|

गोंद क्या होती है

किसी पेड़ के तने को चीरा लगाने पर जो रस/स्राव निकलता है, वह सूखने पर भूरा और कड़ा हो जाता है, उसे हम गोंद कहते है, देसी भाषा में इसे गाद भी कहा जाता है, यह शीतल और पौष्टिक होती है, गोंद में उस पेड़ के औषधीय गुण भी सामिल होते हैं, गोंद का इस्तेमाल आयुर्वेदिक दवाइयों में गोली या वटी बनाने के लिए और पावडर की बाइंडिंग के लिए भी किया जाता है|

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पेड़ की गोंद के प्रकार्तिक गुणgond

बबूल की गोंद: बबूल (कीकर) का गोंद बहुत ही पौष्टिक होता है, यही गोंद सबसे ज्यादा इस्तेमाल में लाया जाता है|

नीम की गोंद: नीम का गोंद रक्त की गति बढ़ाने वाला, स्फूर्तिदायक पदार्थ है। इसे ईस्ट इंडिया गम भी कहते है, इसमें भी नीम के औषधीय गुण होते है|

पलाश की गोंद: पलाश के गोंद के सेवन से हड्डियां मज़बूत बनती है, पलाश का 1 से 3 ग्राम गोंद मिश्रीयुक्त दूध अथवा आँवले के रस के साथ लेने से बल एवं वीर्य में वृद्धि होती है, तथा अस्थियाँ मजबूत बनती हैं, और शरीर हष्ट पुष्ट रहता है।

आम की गोंद: आम की गोंद स्तंभक एवं रक्त प्रसादक है। इस गोंद को गरम करके फोड़ों पर लगाने से पीब पककर बाहर बह जाती है, और आसानी से घाव भर जाता है। आम की गोंद को नीबू के रस में मिलाकर चर्म रोग पर लेप किया जाए तो चर्म रोग में राहत मिलती है।

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सेमल (मोचरस) की गोंद: सेमल का गोंद जिसको की हम मोचरस भी कह सकते है, पित्त के शमन के लिए बहुत ही अच्छी दवा है, मोचरस चूर्ण का 1 से ३ ग्राम की मात्र का सेवन दही के साथ करने से अतिसार की अवस्था में आराम मिलता है, और इसके चूर्ण में इतनी ही मात्रा में चीनी मिलकर लेने से श्वेत प्रदर की समस्या को दूर किया जा सकता है| इसका इस्तेमाल दांतों की सफाई के लिए भी किया जाता है|

कबीट की गोंद: बारिश के मौसम के बाद कबीट के पेड़ से गोंद निकलती है, जो गुणवत्ता में बबूल की गोंद के बराबर मानी जाती है।

गुग्गुल की गोंद: गुग्गुल एक बहुवर्षी झाड़ीनुमा वृक्ष है, जिसके तने व शाखाओं से गोंद निकलता है, जो सगंध, गाढ़ा तथा अनेक वर्ण वाला होता है. यह जोड़ों के दर्द के निवारण और धुप अगरबत्ती आदि में इस्तेमाल होता है|

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प्रपोलीश की गोंद: प्रपोलीश यह पौधों द्धारा श्रावित गोंद है जो मधुमक्खियॉं पौधों से इकट्ठा करती है इसका उपयोग डेन्डानसैम्बू बनाने मंच तथा पराबैंगनी किरणों से बचने के रूप में किया जाता है।

ग्वार की गोंद: ग्वार फली के बीज में ग्लैक्टोमेनन नामक गोंद होती है, ग्वार से प्राप्त गम का उपयोग दूध से बने पदार्थों जैसे आइसक्रीम, पनीर आदि में किया जाता है। इसके साथ ही अन्य कई व्यंजनों में भी इसका प्रयोग किया जाता है| ग्वार के बीजों से बनाया जाने वाला पेस्ट भोजन, औषधीय उपयोग के साथ ही अनेक उद्योगों में भी काम आता है।

हिंग भी एक गोंद है जो फेरूला कुल (अम्बेलीफेरी, दूसरा नाम एपिएसी) के तीन पौधों की जड़ों से निकलने वाला यह सुगंधित गोंद रेज़िननुमा होता है । फेरूला कुल में ही गाजर भी आती है।

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हींग दो किस्म की होती है – एक पानी में घुलनशील होती है जबकि दूसरी तेल में। किसान पौधे के आसपास की मिट्टी हटाकर उसकी मोटी गाजरनुमा जड़ के ऊपरी हिस्से में एक चीरा लगा देते हैं। इस चीरे लगे स्थान से करीब तीन महीनों तक एक दूधिया रेज़िन निकलता रहता है। इस अवधि में लगभग एक किलोग्राम रेज़िन निकलता है। हवा के संपर्क में आकर यह सख्त हो जाता है, कत्थई पड़ने लगता है। यदि सिंचाई की नाली में हींग की एक थैली रख दें, तो खेतों में सब्ज़ियों की वृद्धि अच्छी होती है, और वे संक्रमण मुक्त रहती है। पानी में हींग मिलाने से इल्लियों का सफाया हो जाता है, और इससे पौधों की वृद्धि भी बढ़िया से होती है|

इसके अलावा भी बहुत से ऐसे गोंद है जिनमें औषधीय गुण होते है, जिनमे से उनके प्राकर्तिक गुण प्राप्त होते है, जैसे बेर, पीपल, अर्जुन आदि के पेड़ो के गोंद से|

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ऊपर आपने जाना की गोंद के फायदे हमारे लिए कितने अधिक लाभकारी और उपयोगी है| लेकिन इसकी सही मात्र और सही तरीके से उपयोग करना जरुरी होता है, नहीं तो आपको इसके नुकसान भी उठाने पढ़ सकते है| वैसे तो गोंद के नुकसान काफी कम होते है, आइये जानते है गोंद के नुकसान क्या है।

कुछ लोगो को गोंद के इस्तेमाल से एलर्जी हो सकती है, इससे बचने के लिए पहले थोड़ी मात्र में गोंद का सेवन करें।
गोंद का अधिक मात्र में सेवन करने से बचे इसका अधिक सेवन शरीर के अंगों जैसे की लीवर व किडनी को ख़राब कर सकता है।


सुनील कुमार

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