चैत्र नवरात्री का धार्मिक और वैज्ञान‌िक दृष्ट‌ि से महत्त्व


नवरात्रि एक हिंदू पर्व है। नवरात्रि एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है ‘नौ रातें’। इन नौ रातों और दस दिनों के दौरान, शक्ति/देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के नौ रातों में माँ दुर्गा के नौ स्वरुपों की पूजा होती है जिन्हें नवदुर्गा कहते हैं। इन नौ रातों और दस दिनों के दौरान, शक्ति/देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है। दुर्गा का मतलब जीवन के दुख कॊ हटाने वाली होता है। नवरात्रि एक महत्वपूर्ण और प्रमुख त्योहार है जिसे पूरे भारत में एक महान उत्साह के साथ मनाया जाता है।

नवरात्र का महत्व स‌िर्फ धर्म, अध्यात्म और ज्योत‌िष की दृष्ट‌ि से ही नहीं है बल्क‌ि वैज्ञान‌िक दृष्ट‌ि से भी नवरात्र का अपना महत्व है। ऋतु बदलने के ल‌िए समय रोग ज‌िन्हें आसुरी शक्त‌ि कहते हैं उनका अंत करने के ल‌िए हवन, पूजन क‌िया जाता है ज‌िसमें कई तरह की जड़ी, बूट‌ियों और वनस्पत‌ियों का प्रयोग क‌िया जाता है। हमारे ऋष‌ि मुन‌ियों ने न स‌िर्फ धार्म‌िक दृष्ट‌ि को ध्यान में रखकर नवरात्र में व्रत और हवन पूजन करने के ल‌िए कहा है बल्क‌ि इसका वैज्ञान‌िक आधार भी है। नवरात्र के दौरान व्रत और हवन पूजन स्वास्थ्य के ल‌िए बहुत ही बढ़‌िया है। इसका कारण यह है क‌ि चारों नवरात्र ऋतुओं के संध‌िकाल में होते हैं यानी इस समय मौसम में बदलाव होता है ज‌िससे शारीरिक और मानस‌िक बल की कमी आती है। शरीर और मन को पुष्ट और स्वस्थ बनाकर नए मौसम के ल‌िए तैयार करने के ल‌िए व्रत क‌िया जाता है।

इस वर्ष चैत्र नवरात्रि 2020 (Chaitra Navratri 2020)

नवरात्रि

दिन

तिथियाँ

नौ देवियाँ

प्रथम नवरात्रि बुधवार 25 मार्च 2020 माँ शैलपुत्री
द्वितीया नवरात्रि बृहस्पतिवार 26 मार्च 2020 देवी ब्रह्मचारिणी
तृतीया नवरात्रि शुक्रवार 27 मार्च  2020 देवी चन्द्रघंटा
चतुर्थी नवरात्रि शनिवार 28 मार्च 2020 देवी कूष्मांडा 
पञ्चमी नवरात्रि रविवार 29 मार्च 2020 स्कंदमाता
षष्ठी नवरात्रि सोमवार 30 मार्च 2020 माँ कात्यायनी
सप्तमी नवरात्रि मंगलवार 31 मार्च 2020 माँ कालरात्रि
अष्टमी नवरात्रि बुधवार 01 अप्रैल 2020 माँ महागौरी
नवमी नवरात्रि बृहस्पतिवार 02 अप्रैल 2020 सिद्धदात्री माता

माता के नौ रुप है :-

  1. शैलपुत्री – इसका अर्थ- पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण इनका नाम ‘शैलपुत्री’ पड़ा।
  2. ब्रह्मचारिणी – इसका अर्थ- ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली।
  3. चंद्रघंटा – इसका अर्थ- माँ चंद्रघंटा की कृपा से अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं, दिव्य सुगंधियों का अनुभव होता है तथा विविध प्रकार की दिव्य ध्वनियाँ सुनाई देती हैं।
  4. कूष्माण्डा – इसका अर्थ- अपनी मंद, हल्की हँसी द्वारा अंड अर्थात ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें कूष्माण्डा देवी के रूप में पूजा जाता है। संस्कृत भाषा में कूष्माण्डा को कुम्हड़ कहते हैं।
  5. स्कंदमाता – इसका अर्थ- स्कंदमाता मोक्ष के द्वार खोलने वाली माता परम सुखदायी हैं। माँ अपने भक्तों की समस्त इच्छाओं की पूर्ति करती हैं।
  6. कात्यायनी – इसका अर्थ- कत गोत्र में उत्पन्न स्त्री। कात्यायन ऋषि की पत्नी। वह विधवा जो कषाय वस्त्र पहनती हो। दुर्गा की एक मूरति या रूप।
  7. कालरात्रि – इसका अर्थ- दुर्गा पूजा के सातवें दिन माँ कालरात्रि की उपासना का विधान है। इस दिन साधक का मन … नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। अर्थ : हे माँ! सर्वत्र विराजमान और कालरात्रि के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है।
  8. महागौरी – इसका अर्थ- माँ महागौरी ने देवी पार्वती रूप में भगवान शिव को पति-रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी
  9. सिद्धिदात्री – इसका अर्थ- नवदुर्गाओं में सबसे श्रेष्ठ, सिद्धि और मोक्ष देने वाली दुर्गा को सिद्धिदात्री कहते हैं।

सुनील कुमार

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