देवी चंद्रघंटा जी की आरती हिंदी और इंग्लिश मे {2020}


पूजा  के अंत में हम सभी देवी – देवताओं की आरती करते हैं। आरती पूजन के अन्त में हम इष्टदेवी ,पूजा  के अंत में हम सभी देवी – देवताओं की आरती करते हैं। आरती पूजन के अन्त में हम इष्टदेवी ,इष्टदेवता की प्रसन्नता के हेतु की जाती है। इसमें इष्टदेव को दीपक दिखाने के साथ उनका स्तवन तथा गुणगान किया जाता है। यह देवी – देवताओं  के गुणों की प्रशंसा गीत है। आरती आम तौर पर एक पूजा या भजन सत्र के अंत में किया जाता है। यह पूजा समारोह के एक भाग के रूप में गाया जाता है।

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देवी चंद्रघंटा का स्वरुप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है । इनके मस्तक में घंटे के आकार का अर्धचंद्र है । इसी कारण इस देवी का नाम चंद्रघंटा पड़ा । इनके शरीर का रंग स्वर्ण के समान चमकीला है । इनका वाहन सिंह है । कंठ में सफ़ेद फूलों की माला है । इनकी पूजा से बल और बुद्धि का विकास होता है और युक्ति, शक्ति व प्रकृति सब साधक का साथ देते हैं । आज हम आपके साथ देवी चंद्रघंटा जी की आरती हिन्दी तथा इंग्लिश मे साझा कर रहे है आप अपने सुविधा अनुसार कोई भी माध्यम चुन सकतें है|

देवी चंद्रघंटा जी की आरती (Deity Chandraghanta Aarti in Hindi)

जय मां चंद्रघंटा सुख धाम ।
पूर्ण कीजो मेरे काम ।।

चंद्र समाज तू शीतल दाती ।
चंद्र तेज किरणों में समाती ।।

क्रोध को शांत बनानेवाली ।
मीठे बोल सिखानेवाली ।।

मन की मालक मन भाती हो ।
चंद्रघंटा तुम वरदाती हो ।।

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सुंदर भाव को लानेवाली ।
हर संकट में बचानेवाली।।

हर बुधवार जो तुझे ध्याए ।
श्रद्धा सहित तो विनय सुनाए ।।

मूर्ति चंद्र आकार बनाए ।
सन्मुख घी की जोत जलाए ।।

शीश झुका कहे मन की बाता ।
पूर्ण आस करो जगतदाता ।।

कांचीपुर स्थान तुम्हारा ।
करनाटिका में मान तुम्हारा ।।

नाम तेरा रटूं महारानी ।
भक्त की रक्षा करो भवानी ।।

Deity Chandraghanta Aarti in English 

Jai maa chandraghanta sukh dham ।
Purn kijo mere kaam ।।

Chandra samaan tu shital dati ।
Chandra tej kirno men samati ।।

Krodh ko shant bananevali ।
Mithe bol sikhanevali ।।

Man ki malak man bhati ho ।
Chandraghanta tum vardati ho ।।

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Sunder bhaav ko lane vali ।
Har sankat men bachane vali ।।

Har budhvaar jo tujhe dhyaye ।
Shraddhaa sahit to vinay sunaye ।।

Murti Chandra aakar banaye ।
Sanmukh ghee ki jot jalaye ।।

Shish jhuka kahe man ki bata ।
Purn aas karo Jagdata ।।

Kanchipur sthan tumhara ।
Karnaatika men maan tumhara ।।

Naam tera ratoon maharani ।
Bhakt ki raksha karo bhavani ।।

माता के नौ रुप

नवरात्रों में माता के नौ रुपों की आराधना की जाती है। माता के इन नौ रुपों की हम विभिन्न रूपों में उपासना करते है|

  1. शैलपुत्री – इसका अर्थ- पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण इनका नाम ‘शैलपुत्री’ पड़ा।
  2. ब्रह्मचारिणी – इसका अर्थ- ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली।
  3. चंद्रघंटा – इसका अर्थ- माँ चंद्रघंटा की कृपा से अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं, दिव्य सुगंधियों का अनुभव होता है तथा विविध प्रकार की दिव्य ध्वनियाँ सुनाई देती हैं।
  4. कूष्माण्डा – इसका अर्थ- अपनी मंद, हल्की हँसी द्वारा अंड अर्थात ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें कूष्माण्डा देवी के रूप में पूजा जाता है। संस्कृत भाषा में कूष्माण्डा को कुम्हड़ कहते हैं।
  5. स्कंदमाता – इसका अर्थ- स्कंदमाता मोक्ष के द्वार खोलने वाली माता परम सुखदायी हैं। माँ अपने भक्तों की समस्त इच्छाओं की पूर्ति करती हैं।
  6. कात्यायनी – इसका अर्थ- कत गोत्र में उत्पन्न स्त्री। कात्यायन ऋषि की पत्नी। वह विधवा जो कषाय वस्त्र पहनती हो। दुर्गा की एक मूरति या रूप।
  7. कालरात्रि – इसका अर्थ- दुर्गा पूजा के सातवें दिन माँ कालरात्रि की उपासना का विधान है। इस दिन साधक का मन … नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। अर्थ : हे माँ! सर्वत्र विराजमान और कालरात्रि के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है।
  8. महागौरी – इसका अर्थ- माँ महागौरी ने देवी पार्वती रूप में भगवान शिव को पति-रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी
  9. सिद्धिदात्री – इसका अर्थ- नवदुर्गाओं में सबसे श्रेष्ठ, सिद्धि और मोक्ष देने वाली दुर्गा को सिद्धिदात्री कहते हैं।

कैसे करें देवी चंद्रघंटा की सच्ची आरती ?

यह बात तो सब जानते ही है की संसार पंच महाभूतों—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश से बना है। आरती में ये पांच वस्तुएं (पंच महाभूत) रहते है—

  1. पृथ्वी की सुगंध—कपूर
  2. जल की मधुर धारा—घी
  3. अग्नि—दीपक की लौ
  4. वायु—लौ का हिलना
  5. आकाश—घण्टा, घण्टी, शंख, मृदंग आदि की ध्वनि

इस प्रकार सम्पूर्ण संसार से ही भगवान की आरती होती है।

मानव शरीर से भी कर सकतें है सच्ची आरती

मानव शरीर भी पंचमहाभूतों से बना है । मनुष्य अपने शरीर से भी ईश्वर की आरती कर सकता है ।

जाने कैसे ?

अपने देह का दीपक, जीवन का घी, प्राण की बाती, और आत्मा की लौ सजाकर भगवान के इशारे पर नाचना—यही सच्ची आरती है। इस तरह की सच्ची आरती करने पर संसार का बंधन छूट जाता है और जीव को भगवान के दर्शन होने लगते हैं।


सुनील कुमार

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