ललिता माता जी की आरती हिंदी


पूजा  के अंत में हम सभी देवी – देवताओं की आरती करते हैं। आरती पूजन के अन्त में हम इष्टदेवी ,पूजा  के अंत में हम सभी देवी – देवताओं की आरती करते हैं। आरती पूजन के अन्त में हम इष्टदेवी ,इष्टदेवता की प्रसन्नता के हेतु की जाती है। इसमें इष्टदेव को दीपक दिखाने के साथ उनका स्तवन तथा गुणगान किया जाता है। यह देवी – देवताओं  के गुणों की प्रशंसा गीत है। आरती आम तौर पर एक पूजा या भजन सत्र के अंत में किया जाता है। यह पूजा समारोह के एक भाग के रूप में गाया जाता है।

बहुत कम लोग जानते हैं कि इलाहावाद स्थित ललिता देवी शक्ति पीठ ईक्यावन शक्ति पीठों में विशेष रूप से महत्वपूर्ण तथा पूजनीय है। जिन ईक्यावन शक्ति पीठों का नाम शास्त्रों मे आता है उसमें प्रयाग स्थित ललिता देवी का नाम इसलिये ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है कि यह देवी महर्षि भारद्वाज तथा सम्भवतः राम द्वारा भी पूजित हैं। यह भी आगमो मे वर्णित है कि विश्रवा मुनि के पुत्र कुबेर ने भी देवी की यहां गुप्त आराधना की थी। ललिता देवी प्रयाग की ही नहीं अपितु पूर्वीभारत की प्रमुख देवी कहीं जाती हैं तथा इन्हें लालित्य तथा ज्ञान की देवी कहा जाता हैं।

श्री ललिता माता जी की आरती (Deity Lalita Aarti in Hindi)

श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी।
राजेश्वरी जय नमो नमः॥

करुणामयी सकल अघ हारिणी।
अमृत वर्षिणी नमो नमः॥

जय शरणं वरणं नमो नमः।
श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी॥

अशुभ विनाशिनी, सब सुख दायिनी।
खल-दल नाशिनी नमो नमः॥

भण्डासुर वधकारिणी जय माँ।
करुणा कलिते नमो नम:॥

जय शरणं वरणं नमो नमः।
श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी॥

भव भय हारिणी, कष्ट निवारिणी।
शरण गति दो नमो नमः॥

शिव भामिनी साधक मन हारिणी।
आदि शक्ति जय नमो नमः॥

जय शरणं वरणं नमो नमः।
जय त्रिपुर सुन्दरी नमो नमः॥

श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी।
राजेश्वरी जय नमो नमः॥

कैसे करें ललिता माता जी की सच्ची आरती ?

यह बात तो सब जानते ही है की संसार पंच महाभूतों—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश से बना है। आरती में ये पांच वस्तुएं (पंच महाभूत) रहते है—

  1. पृथ्वी की सुगंध—कपूर
  2. जल की मधुर धारा—घी
  3. अग्नि—दीपक की लौ
  4. वायु—लौ का हिलना
  5. आकाश—घण्टा, घण्टी, शंख, मृदंग आदि की ध्वनि

इस प्रकार सम्पूर्ण संसार से ही भगवान की आरती होती है।

मानव शरीर से भी कर सकतें है सच्ची आरती

मानव शरीर भी पंचमहाभूतों से बना है । मनुष्य अपने शरीर से भी ईश्वर की आरती कर सकता है ।

जाने कैसे ?

अपने देह का दीपक, जीवन का घी, प्राण की बाती, और आत्मा की लौ सजाकर भगवान के इशारे पर नाचना—यही सच्ची आरती है। इस तरह की सच्ची आरती करने पर संसार का बंधन छूट जाता है और जीव को भगवान के दर्शन होने लगते हैं।


सुनील कुमार

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