श्री सरस्वती जी की आरती हिंदी और इंग्लिश मे {2020}


पूजा  के अंत में हम सभी देवी – देवताओं की आरती करते हैं। आरती पूजन के अन्त में हम इष्टदेवी ,इष्टदेवता की प्रसन्नता के हेतु की जाती है। इसमें इष्टदेव को दीपक दिखाने के साथ उनका स्तवन तथा गुणगान किया जाता है। यह देवी – देवताओं  के गुणों की प्रशंसा गीत है। आरती आम तौर पर एक पूजा या भजन सत्र के अंत  में किया जाता है। यह पूजा समारोह के एक भाग के रूप में गाया जाता है।

हिन्दू धर्म मे माता सरस्वती जी को ज्ञान और बुद्धि की माता माना जाता है| मनुष्य को कोई भी ज्ञान इनकी पूजा के बिना संभव नहीं है| देवी सरस्वती वेदों की जननी है| कोई भी बिना ज्ञान के मुक्ति नहीं पा सकता। लोग पूजा के बाद देवी सरस्वती जी की आरती सम्पूर्ण ज्ञान और बुद्धि के आशीर्वाद की प्राप्ति के लिये करते है। आज हम आपके साथ देवी सरस्वती जी की आरती हिन्दी तथा इंग्लिश मे साझा कर रहे है आप अपने सुविधा अनुसार कोई भी माध्यम चुन सकतें है|

श्री सरस्वती जी की आरती (1) (Deity Saraswati Aarti in Hindi)

आरती करूं सरस्वती मातु,
हमारी हो भव भय हारी हो।

हंस वाहनपदमासन तेरा,
शुभ वस्त्र अनुपम है तेरा।

रावण का मान कैसे फेरा,
वर मांगत बन गया सबेरा।

यह सब कृपा तिहारी हो,
उपकारी हो मातु हमारी

तमोज्ञान नाशक तुम रवि हो,
हम अम्बुजन विकास करती हो।

मंगलभवन मातु सरस्वती हो,
बहुकूकन बाचाल करती हो।

विद्या देने वाली वाणी धारी हो,
मातु हमारी हो।

तुम्हारी कृपा गणनायक,
लायक विष्णु भये जग के पालक।

अम्बा कहायी सृष्टि ही कारण,
भये शम्भु संसार ही घालक बन्दों आदि।

भवानी जग, सुखकारी हो, मातु हमारी हो।
सद्बुद्धि विद्याबल मोही दीजै,
तुम अज्ञान हटा रख लीजै।

जन्मभूमि हित अर्पण कीजे,
कर्मवीर भस्महिं कर दीजै।

ऐसी विनय हमारी, भवभयहारी हो,
मातु हमारी हो।

Deity Saraswati Aarti in English (1)

Aarti karu Saraswati matu,
Hamari ho bhav bhay hari ho.

Hans wahanpadmasan tera,
Subh vastra anupam hai tera.

Ravan ka maan kaise phera,
Var mangat ban gaya sebera.

Yeh sab kripa tehari ho,
Upkari ho matu hamari ho.

Tamogyan nashak tum ravi ho,
Hum ambujan vikas karti ho.

Bahukukan bachal karti ho,
Matu hamari ho.

Tumhari kripa gannayak,
Layak Vishnu bhay jag kay palak.

Amba kahi shristi he karan,
Bhay sambhu sansar he ghalak bando aadi.

Bhavani jag, sukhkari ho, matu hamri ho.
Sadbuddhi vidhyabal mohi deejay,

Tum aggyan hatta rakh leejay.
Janambhoomi hit arpan keejay,
karmveer bhasmahi kar deejay.

Asi vinay hamri, bhavbhayhari ho,
matu hamri ho.

श्री सरस्वती जी की आरती (2) (Deity Saraswati Aarti in Hindi)

जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता |
सदूगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता || मैया जय

चन्द्रवदीन पदूमासिनि, द्युति मंगलकारी |
सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी || मैया जय

बाएँ कर में वीणा, दाएं कर माला |
शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियन माला || मैया जय

देवी शरण जो आए, उनका उद्धार किया |
पैठि मंथरा दासी, रावण संहार किया || मैया जय

विधा ज्ञान प्रदायिनी, ज्ञान प्रकाश भरो |
मोह, अज्ञान और तिमिर का, जग से नाश करो || मैया जय

धूप दीप फल मेवा, माँ स्वीकार करो |
ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्दर करो || मैया जय

माँ सरस्वती की आरती, जो कोई जन गावे |
हितकारी सुखकारी, ज्ञान भक्ति पावे || मैया जय

Deity Saraswati Aarti in English Text (2)

Om jai saraswati mata, jai jai saraswati mata
Sadgun vaibhav shalini, tribhuvan vikhyata
Jai jai saraswati mata

Chandravadani padmasini dyuti mangal kaari
Sohe shubh hans sawaari, atul tej dhaari
Jai jai saraswati mata

Baaye kar mein veena, daaye kar mala
Sheesh mukut mani shohe, gale motiyan mala
Jai jai saraswati mata

Devi sharan jo aaye, unka uddhar kiya
Baithi manthra dasi, rawan sanhar kiya
Jai jai saraswati mata

Vidya gyan pradayini, jag mein gyan prakash bharo
Moh aur agyan timir ka jag se nash karo
Jai jai saraswati mata

Dhoop deep fal meva, man swikaar karo
Gyanchkshu de mata , jag nistar karo
Jai jai saraswati mata

Maa sarswati ji aarti jo koi nar gave
Hitkari shukhkari gyan bhakti pave
Jai jai saraswati mata

श्री सरस्वतीमाता की आरती (3) (Deity Saraswati Aarti in Hindi)

कज्जल पुरित लोचन भारे, स्तन युग शोभित मुक्त हारे |
वीणा पुस्तक रंजित हस्ते, भगवती भारती देवी नमस्ते॥
जय सरस्वती माता ,जय जय हे सरस्वती माता |
दगुण वैभव शालिनी ,त्रिभुवन विख्याता॥
जय….. चंद्रवदनि पदमासिनी , घुति मंगलकारी |
सोहें शुभ हंस सवारी,अतुल तेजधारी ॥
जय….. बायेँ कर में वीणा ,दायें कर में माला |
शीश मुकुट मणी सोहें ,गल मोतियन माला ॥
जय….. देवी शरण जो आयें ,उनका उद्धार किया |
पैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया ॥
जय….. विद्या ज्ञान प्रदायिनी , ज्ञान प्रकाश भरो |
मोह और अज्ञान तिमिर का जग से नाश करो ॥
जय….. धुप ,दिप फल मेवा माँ स्वीकार करो |
ज्ञानचक्षु दे माता , भव से उद्धार करो ॥
जय….. माँ सरस्वती जी की आरती जो कोई नर गावें |
हितकारी ,सुखकारी ग्यान भक्ती पावें ॥
जय….. जय सरस्वती माता ,जय जय हे सरस्वती माता |
सदगुण वैभव शालिनी ,त्रिभुवन विख्याता॥
जय…..बिन मांगे मोती मिले मांगे मिले ना भीख |


सुनील कुमार

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