तुलसी माता जी की आरती हिंदी और इंग्लिश मे {2020}


पूजा  के अंत में हम सभी देवी – देवताओं की आरती करते हैं। आरती पूजन के अन्त में हम इष्टदेवी ,इष्टदेवता की प्रसन्नता के हेतु की जाती है। इसमें इष्टदेव को दीपक दिखाने के साथ उनका स्तवन तथा गुणगान किया जाता है। यह देवी – देवताओं  के गुणों की प्रशंसा गीत है। आरती आम तौर पर एक पूजा या भजन सत्र के अंत  में किया जाता है। यह पूजा समारोह के एक भाग के रूप में गाया जाता है।

हिन्दू धर्म के अनुसार भगवान विष्णु ने तुलसी (वृंदा) से विवाह किया था और उन्हें वरदान दिया था की कोई भी मनुष्य मेरे शालिग्राम रूप के साथ तुलसी का विवाह करेगा उसे इस लोक और परलोक में विपुल यश प्राप्त होगा। आज हम आपके साथ तुलसी जी की आरती हिन्दी तथा इंग्लिश मे साझा कर रहे है आप अपने सुविधा अनुसार कोई भी माध्यम चुन सकतें है|

माँ तुलसी जी की आरती  (1) (Deity Tulsi Aarti in Hindi)

जय जय तुलसी माता
सब जग की सुख दाता, वर दाता
जय जय तुलसी माता

सब योगो के ऊपर, सब रोगों के ऊपर
रुज से रक्षा करके भव त्राता
जय जय तुलसी माता

बहु पुत्री हे श्यामा, सुर बल्ली हे ग्राम्या
विष्णु प्रिये जो तुमको सेवे, सो नर तर जाता
जय जय तुलसी माता

हरि के शीश विराजत त्रिभुवन से हो वन्दित
पतित जनो की तारिणी, तुम हो विख्याता
जय जय तुलसी माता

लेकर जन्म विजन में आई दिव्य भवन में
मानवलोक तुम्ही से सुख संपति पाता
जय जय तुलसी माता

हरि को तुम अति प्यारी श्यामवरण सुकुमारी
प्रेम अजब हैं उनका तुमसे कैसा नाता
जय जय तुलसी माता

Deity Tulsi Aarti in English  (1)

Jai Jai Tulsi Mata
Sab Jag Ki Sukh Daata, Var Daata
Jai Jai Tulsi Mata

Sab Yogo Ke Upar, Sab Rogo Ke Upar
Ruj Se Raksha Karke Bhav Trata
Jai Jai Tulsi Maata

Bahu Putri He Shyama, Sur Balli Hai Graamya
Vishnu Priye Jo Tumko Seve,So Nar Tar Jaata
Jai Jai Tulsi Mata

Hari Ke Shish Viraajat Tribhuvan Se Ho Vandit
Patit Jano Ki Taarini, Tum Ho Vikhyata
Jai Jai Tulsi Mata

Lekar Janam Vijan Me Aayi Divya Bhavan Me
Maanavlok Tumhi Se Sukh Sampati Paata
Jai Jai Tulsi Mata

Hari Ko Tum Ati Pyaari Shyaamvaran Sukumaari
Prem Ajab Hai Unka Tumse Kaisa Naata
Jai Jai Tulsi Mata

तुलसी माता जी की आरती  (2) (Deity Tulsi Aarti in Hindi)

तुलसी महारानी नमो नमो, हरी की पटरानी नमो नमो
तुलसी महारानी नमो नमो, हरी की पटरानी नमो नमो
नमो नमो, नमो नमो, नमो नमो

तुलसी महारानी नमो नमो,
हरी की पटरानी नमो नमोधन तुलसी पूरण तप कीनो,
शालिग्राम बनी पटरानी नमो नमोतुलसी महारानी नमो नमो,
हरी की पटरानी नमो नमोनमो नमो,
नमो नमो, नमो नमो

तुलसी महारानी नमो नमो,
हरी की पटरानी नमो नमोजाके पत्र मंजर कोमल,
श्रीपति कमल चरण लपटानी नमो नमोतुलसी महारानी नमो नमो,
हरी की पटरानी नमो नमोनमो नमो, नमो नमो, नमो नमो
तुलसी महारानी नमो नमो, हरी की पटरानी नमो
नमोधुप दीप नैवेद्य आरती,
पुष्पन की वर्षा बरसानी नमो नमोतुलसी महारानी नमो नमो,
हरी की पटरानी नमो नमोनमो नमो,
नमो नमो, नमो नमो

तुलसी महारानी नमो नमो,
हरी की पटरानी नमो नमोछप्पन भोग छत्तीसो व्यंजन,
बिन तुलसी हरी एक ना मानी नमो नमोतुलसी महारानी नमो नमो,
हरी की पटरानी नमो नमोनमो नमो,
नमो नमो, नमो नमो

तुलसी महारानी नमो नमो,
हरी की पटरानी नमो नमोसभी सखी मैया तेरो यश गावे,
भक्तिदान दीजै महारानी नमो नमोतुलसी महारानी नमो नमो,
हरी की पटरानी नमो नमोनमो नमो,
नमो नमो, नमो नमो

तुलसी महारानी नमो नमो, हरी की पटरानी नमो नमो

Deity Tulsi Aarti in English  (2)

Tulsi maharani namo namo
Hari ki patrani namo namo
Tulsi maharani namo namo
Hari ki patrani namo namo
Namo namo namo namo

Tum tulsi puran tap kini
Hari charan kamal laptaani
Namo namo
Tulsi maharani namo namo
Hari ki patrani namo namo
Namo namo namo namo

Tulasi ke patt manjari ko man
Bin tulsi hari ek na maani
Namo namo
Tulsi maharani namo namo
Hari ki patrani namo namo
Namo namo namo namo

Sur nar muni tera dhyan dharat hai
Aagam nigam puran bakhani
Namo namo
Tulsi maharani namo namo
Hari ki patrani namo namo
Namo namo namo namo

Lakshmi maiya tere gun gave
Bhakti daan deeje maharani
Namo namo
Tulsi maharani namo namo
Hari ki patrani namo namo
Namo namo namo namo

Tulsi maharani namo namo
Hari ki patrani namo namo

कैसे करें माँ तुलसी जी की सच्ची आरती ?

यह बात तो सब जानते ही है की संसार पंच महाभूतों—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश से बना है। आरती में ये पांच वस्तुएं (पंच महाभूत) रहते है—

  1. पृथ्वी की सुगंध—कपूर
  2. जल की मधुर धारा—घी
  3. अग्नि—दीपक की लौ
  4. वायु—लौ का हिलना
  5. आकाश—घण्टा, घण्टी, शंख, मृदंग आदि की ध्वनि

इस प्रकार सम्पूर्ण संसार से ही भगवान की आरती होती है।

मानव शरीर से भी कर सकतें है सच्ची आरती

मानव शरीर भी पंचमहाभूतों से बना है । मनुष्य अपने शरीर से भी ईश्वर की आरती कर सकता है ।

जाने कैसे ?

अपने देह का दीपक, जीवन का घी, प्राण की बाती, और आत्मा की लौ सजाकर भगवान के इशारे पर नाचना—यही सच्ची आरती है। इस तरह की सच्ची आरती करने पर संसार का बंधन छूट जाता है और जीव को भगवान के दर्शन होने लगते हैं।


सुनील कुमार

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