संध्या काल में क्या न करें


संध्‍या काल यानी शाम के समय कुछ ऐसे काम हैं जो आपके लिए करना वर्जित हैं और इन्हें करने से देवी-देवता रूठ जाते हैं। वास्तव में सूर्यास्त होते ही नकारात्मक शक्तियां हावी हो जाती हैं। कुछ काम एसे हे जिन्हें धर्म गर्न्थों में शाम के समय करने की मनाई हैं, कुछ एसे काम हे जो आपको शाम के समय करने पर शारीरिक परेशानियों के साथ-साथ आर्थिक दिक्कतों का भी सामना करना पड़ सकता है।

तो आइए जानें कौन से हैं वे काम

:- शास्त्रों के अनुसार सुबह ब्रह्म मुहुर्त में ही उठ जाना चाहिए। इस समय की ताजी हवा कई बीमारियों को होने से रोकती है। जो व्यक्ति सूर्योदय के बाद भी देर तक सोते रहते हैं, उनका स्वास्थ्य तो प्रभावित होता ही है, साथ ही महालक्ष्मी भी उनसे रूठ जाती हैं। ऐसे लोगों के जीवन में कभी बरकत नहीं होती और वो सदैव तनाव में रहते हैं।

:- वास्तव में सूर्यास्त होते ही नकारात्मक शक्तियां हावी हो जाती हैं। उनके दुष्प्रभाव को शांत करने के लिए या उन शक्तियों को क्षीण करने के लिए सुबह की भांति शाम को भी देवी-देवताओं की आराधना करनी चाहिए। जिससे सकारात्मकता का माहौल बना रहे।evening

:- संध्या के समय झाड़ू न लगाएं इससे सकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और नकारात्मकता बलवान होती है।

:- शास्त्रों के अनुसार हमें संध्या काल में भोजन नहीं करना चाहिए। कहते हैं, जो लोग ऐसा करते हैं उन्हें अक्सर ही पेट से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यदि बहुत ज्यादा भूख लगी भी हो तो इस वक्त आप हल्का-फुल्का नाश्ता या फल आदि ले सकते हैं। हां, यदि कोई बुजुर्ग या बीमार है तो यह नियम उनपर लागू नहीं होता।

:- शाम को तुलसी पर जल ना चढ़ाएं। तुलसी पर सूर्योदय होने पर जल चढ़ाएं, शाम केवल दीप अर्पित करें।

:- ऐसी मान्यता है कि सूर्यास्त के समय सभी देवी-देवता पृथ्वी पर भ्रमण करते हैं। जिन घरों में शाम के समय पूजा-पाठ हो रहा होता है, उन घरों को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है और जिस घर के लोग सोए होते हैं उस घर में बरकत नहीं होती है।

:- जो व्यक्ति शाम के समय सोता है उसे कई प्रकार के रोग घेर लेते हैं। ऐसे व्यक्ति की आयु क्षीण हो जाती है।

:- सूर्यास्त के बाद सोने से पाचन तंत्र बिगड़ जाता है और आप कब्ज, गैस, अपच जैसी गंभीर बीमारियों के चपेट में आ जाते हैं। सूर्यास्त के बाद सोने से ना केवल आपका वजन बढ़ता है बल्कि यह आपकी याददाश्त पर भी बहुत बुरा असर डालती है।

:- शाम को तुलसी पर जल ना चढ़ाएं। तुलसी पर सूर्योदय होने पर जल चढ़ाएं, शाम केवल दीप अर्पित करें।

:- शाम के समय वेद पाठ भी न हो तो बेहतर है। इस समय देवी-देवताओं की का स्मरण और उनका ध्यान करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है। वेद पाठ एक खास कर्म हैं, जिन्हें कभी भी और कैसे भी करना उचित नहीं माना गया है। इसे ब्रह्म मुहूर्त में करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है। शास्त्रों में लिखा भी गया है कि
|| वारि खलु कार्याणि सन्ध्याकाले विवर्जयेत्। आहारं मैथुनं निद्रां स्वाध्यायञ्च चतुर्थकम् ||

सूर्यास्त के बाद सोने से केवल इन्हें नहीं लगता कोई दोष 

शास्त्रों के अनुसार दिन में केवल गर्भवती स्त्री, शिशु, बुजुर्ग और अस्वस्थ व्यक्ति ही सो सकते हैं। एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए गलत समय पर ली गई नींद स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के अलावा अपशकुन भी लाता है।

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सुनील कुमार

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