दुनिया का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर जो हिन्दुस्तान के बहार है


विश्व के कई महान विज्ञानिको ने माना है की सनातक धर्म विश्व का सबसे पहला धर्म है| और इस बात के कई सबूत भी मिलते और पेश किये जाते हैं कि विश्व के कई देशों में पहले सनातन धर्म ही था। वही सनातन धर्म जिसको हम सभी हिन्दू धर्म के नाम से जानते हैं।

क्या आपको पता है की हिन्दुओ का सबसे बड़ा मंदिर कहाँ पर है?

वैसे तो हिन्दुस्तान को मंदिरों का देश भी कहा जाता है और हिन्दुस्तान में बहुत से छोटे और बहुत बड़े मंदिर है पर क्या आपको पता है की हिन्दुओ का सबसे बड़ा मंदिर कहाँ पर है नहीं तो हम आज आपको बतातें है की हिन्दुओ का सबसे बड़ा मंदिर कहाँ पर है और उसका क्या नाम है अंकोरवाट मंदिर विश्व का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर है| यह ना सिर्फ दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर है बल्कि यह दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक स्थल भी है (क्षेत्रानुसार)

कहाँ पर स्थित है अंकोरवाट का मंदिर

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भारत को बहुत लोग हिंदुत्व का जन्मस्थल मानते हैं लेकिन क्या आपको पता है कि दुनिया का सबसे बड़ा हिन्दुओं का मंदिर भारत में नहीं है दुनिया का सबसे बड़ा हिन्दुओं का मंदिर कंबोडिया देश के अंकोर जिले में है जो सिमरिप शहर में मीकांग नदी के किनारे स्थित है इस मंदिर का नाम यशोधरपुर था जो अब ‘अंकोरवाट’ के नाम से जाना जाता है|

(अगर आप कंबोडिया में स्थित इस अंकोरवाट मंदिर जाना चाहते है तो आप को कोई चिन्ता करने की जरूरत नहीं है हम आपको एक असान तरीका बताने जा रहें है अगर आप सोचते है की वीजा फ़ीस बहुत महंगी होगी या वीजा कैसे बनवाये तो आपको फ़िक्र करने की बिलकुल जरूरत नहीं क्योंकि कंबोडिया देश में आप को आपने देश में उतरते ही 30 दिनों का वीजा घूमने के लिए बना देता है) और इस ही तरह के 59 देश और है जहाँ आप बिना वीजा बिना पासपोर्ट के धूम सकते है ज्यदा जानकारी के लिए Click Here

इस मंदिर की स्थापना कब हुई

अंकोरवाट मंदिर का निर्माण राजा सूर्यवर्मन द्वितीय ने 1112 से 1153 के बीच करवाया था इसकी रक्षा के लिए इसके चारो तरफ एक विशाल खाई बनवाई गई थी जिसकी चौड़ाई लगभग 700 फीट है दूर से देखने पर ये खाई किसी झील के सामान दिखती है खाई पार करने के लिए मंदिर के पश्चिम में एक पुल बनाया गया था, मंदिर का कार्य सूर्यवर्मन द्वितीय ने प्रारम्भ किया था परन्तु इसका समापन धरणीन्द्रवर्मन के शासनकाल में हुआ था |

कितना बड़ा है यह मंदिर

अंकोरवाट का मंदिर ना सिर्फ दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर है बल्कि यह दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक स्थल भी है (क्षेत्रानुसार) 82,0000m2 के क्षेत्रफल में फैला हे यह मंदिर 3.5 किलोमीटर के दायरे में फैला है| 12वीं शताब्दी के लगभग सूर्यवर्मा द्वितीय ने ‘अंकोरवाट’ में विष्णु का एक विशाल मंदिर बनवाया। इस मंदिर की रक्षा भी एक चतुर्दिक खाई करती है जिसकी चौड़ाई लगभग 700 फुट है। दूर से यह खाई झील के समान दिखाई देती है। मंदिर के पश्चिम की ओर इस खाई को पार करने के लिए एक पुल बना हुआ है। पुल को पार कर मंदिर में प्रवेश के लिए एक विशाल द्वार निर्मित है जो लगभग 1,000 फुट चौड़ा है। मंदिर बहुत विशाल है। इसकी दीवारों पर समस्त रामायण मूर्तियों में अंकित है इस मंदिर में हज़ारों अलग-अलग देवी-देवताओं की मूर्तियाँ स्थित हैं यह मंदिर दुनिया के सभी धार्मिक स्थलों से क्षेत्रानुसार सबसे बड़ा है यह मन्दिर मेरु पर्वत का भी प्रतीक है।

पर्यटक यहाँ केवल वास्तुशास्त्र का अनुपम सौंदर्य देखने ही नहीं आते बल्कि यहाँ का सूर्योदय और सूर्यास्त देखने भी आते हैं, इस मंदिर की लोकप्रियता इतनी है कि इसे देश – विदेशों से देखने लाखों लोग हर साल बड़ते जा रहें हैं यह एतिहासिक धरोहर इस देश के लिए कितनी मायने रखती है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसे कम्बोडिया के राष्ट्र ध्वज पर अंकित किया गया है विदेशों में कम्बोडिया की पहचान अंकोरवाट मंदिर ही है

सन 1986 से लेकर 1992 तक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण संस्थान ने इस मंदिर की मरम्मत का भार संभाला था अंगकोर वाट को सन 1992 में ‘वर्ल्ड हेरिटेज साईट’ घोषित कर दिया गया अंकोरवाट एक 1000 साल पुराना मंदिर है, जो आज तक अपनी छाती ताने पूरी दुनिया में अपनी विशालता का परिचय में दे रहा है


सुनील कुमार

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