बढ़ती उम्र का असर ऐसे करें कम


प्रकृति का नियम है कि समय के साथ हर व्यक्ति की उम्र बढ़ती है और बढ़ती उम्र या एजिंग का असर उसके शरीर पर ही नहीं, दिलोदिमाग पर भी दिखाई देता है, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति और भरसक प्रयासों की बदौलत उम्र के असर को कम भी किया जा सकता है। उम्र के प्रभाव को कम करने के उद्देश्य से आज लोग सदियों से चली आ रही प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों को अपना रहे हैं। इनमें व्यक्ति को नियत दिनचर्या का पालन करने और कुछ चीजें अपनाने के निर्देश दिए गए हैं, जिनका पालन करने पर वे न केवल स्वस्थ रह सकते हैं, बल्कि अपनी एजिंग की प्रक्रिया धीमी भी कर सकते हैं।how to Increasing age impacts such low

क्या है बढ़ती उम्र – जब हम छोटे होते हैं, तो हमारे शरीर में नए-नए सैल्स या टिश्यू बहुत तेजी से बनते रहते हैं, जिनकी वजह से हमारा विकास होता है, लेकिन जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती जाती है, नए सैल्स बनने की प्रक्रिया धीमी पड़ती जाती है। साथ ही पुराने सैल्स खत्म होते जाते हैं और डेड सैल्स बढ़ते जाते हैं। 25-30 साल की उम्र के बाद सैल्स बनने की यह प्रक्रिया धीमी पड़ती जाती है और 50-60 साल के बाद बहुत कम हो जाती है। इसका असर हमारे शरीर पर पड़ता है, चाहे वह अंदरूनी तौर पर हो या बाहरी तौर पर। हमारा शरीर कमजोर होता जाता है और चेहरे की चमक कम हो जाती है।

तेज धूप से बचें- लंबे समय तक सूर्य की किरणों के सीधे संपर्क में रहने से त्वचा की नमी घटने के साथ कसाव कम होता है। सूर्य की पराबैंगनी किरणों में अधिक वक्त रहने से त्वचा के कैंसर का खतरा बढ़ता है। धूप में निकलें तो सनग्लास व सनस्क्रीन लगाएं।

बढ़ती उम्र के असर को ऐसे करें कम- यह लंबे समय तक युवा और स्वस्थ रहने का मूल मंत्र है। देर से सोने और देर से उठने की हमारी जीवनशैली कई बीमारियों को तो न्योता देती ही है, समय से पहले एजिंग आने की मुख्य वजह है। आयुर्वेद में सुबह ब्रह्म मुहूर्त यानी 4 या 4: 30 के आसपास उठने और नित्य दिनचर्या से निपटने की बात कही गई है। इसके बाद नियमित रूप से स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज और योगासन करना चाहिए। आयुर्वेद के अनुसार तटीय इलाकों को छोड़ कर हमारे देश के अधिकतर इलाके ठंडे वातावरण वाले हैं। यहां जिम जाना, कठिन व्यायाम करना, अधिक वाकिंग, जॉगिंग करना हमारे वात दोष को बढ़ाता है। इससे एक उम्र के बाद जोड़ों में दर्द या अर्थराइटिस की समस्या ज्यादा होती है। सुबह जल्दी उठने से कई बीमारियां दूर होती हैं और शरीर सेहतमंद रहता है। नियमित रूप से हर 15 दिन में एक दिन उपवास रखना चाहिए। उपवास में तले-भुने या गरिष्ठ भोजन की बजाय फ्रूट जूस या हल्की डाइट लेनी चाहिए। उपवास रखने से शरीर के विषैले पदार्थ बाहर निकल जाते हैं, शरीर साफ हो जाता है और आप जवां बने रहते हैं। शरीर को अंदर से डिटाक्सिफाई करने और स्वस्थ रखने के लिए एक सप्ताह के अंतराल के बाद 8-10 दिन के लिए आयुर्वेदिक हर्ब्स त्रिफला का सेवन करें। रात को सोते समय गर्म पानी के साथ एक चम्मच त्रिफला का सेवन करने से बढ़ती उम्र का असर कम होता है।

हैल्दी फूड्स लें- विटामिन वाले खाद्य पदार्थ भोजन में लें। फल, सब्जियां, नट्स, साबुत अनाज व वनस्पति तेल में विटामिन-सी, ई, ए, बी कॉम्प्लेक्स और विटामिन-‘के’ होते हैं। इनमें खनिज लवण (मिनरल्स) तांबा और जिंक भी है। साथ ही महत्त्वपूर्ण फैटी एसिड है, जो त्वचा को युवा बनाता है। ब्रोकली, फूलगोभी, पालक, लहसुन, पत्तेदार साग व जैतून अलसी और सूरजमुखी के तेल समेत मछली और अंडे लेने से उम्र के दुष्प्रभाव से त्वचा को बचाते हैं।


सुनील कुमार

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