अगहन माह को पवित्र क्यों माना जाता है ?


अगहन या मार्गशीर्ष माह जिसे अंग्रेजी कैलेंडरो मे नवम्बर (Navambar) का महीना भी कहा जाता है| हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्ष के नवम माह का नाम अगहन है। इस माह को मार्गशीर्ष भी कहा जाता है। यूं तो हर माह की अपनी विशेषताएं है लेकिन मार्गशीर्ष का सम्पूर्ण मास धार्मिक दृष्टि से पवित्र माना जाता है। गीता में स्वयं भगवान ने कहा है मासाना मार्गशीर्षोऽयम्।

क्या आप जानते हैं कि अगहन मास को मार्गशीर्ष क्यों कहा जाता है?

अगहन मास को मार्गशीर्ष कहने के पीछे भी कई तर्क हैं। जिनमे से कुछ हम आपको बताते है.

भगवान श्रीकृष्ण की पूजा अनेक स्वरूपों में व अनेक नामों से की जाती है। इन्हीं स्वरूपों में से एक मार्गशीर्ष भी श्रीकृष्ण जी का ही एक रूप है।

अगहन मास को मार्गशीर्ष क्यों कहा जाता है? इस संबंध में शास्त्रों में कहा गया है कि इस माह का संबंध मृगशिरा नक्षत्र से है। ज्योतिष के अनुसार नक्षत्र 27 होते हैं जिसमें से एक है मृगशिरा नक्षत्र| इस माह की पूर्णिमा मृगशिरा नक्षत्र से युक्त होती है। इसी वजह से इस माह को मार्गशीर्ष माह के नाम से जाना जाता है|

भागवत के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने भी कहा था कि सभी माह में मार्गशीर्ष श्रीकृष्ण का ही स्वरूप है। मार्गशीर्ष मास में श्रद्धा और भक्ति से प्राप्त पुण्य के बल पर हमें सभी सुखों की प्राप्ति होती है। इस माह में नदी स्नान और दान-पुण्य का विशेष महत्व है।

क्या करना चाहिए अगहन माह मे?

अगहन माह में नदी स्नान के लिए तुलसी की जड़ की मिट्टी व तुलसी के पत्तों से स्नान करना चाहिए। स्नान के समय ऊँ नमो नारायणाय या गायत्री मंत्र का जप करना चाहिए।

अगहन मास में इन तीन पूण्य पुस्तकों के पाठ की बहुत ज्यादा महिमा है. विष्णुसहस्त्र नाम, भगवत गीता और गजेन्द्रमोक्ष की खूब महिमा है, इसे दिन में 2 बार 3 बार पढनी चाहिय|

अगहन मास में ‘श्रीमद भागवत’ ग्रन्थ को देखने की भी महिमा है स्कन्द पुराण में लिखा है घर में अगर भागवत हो तो एक बार दिन में उसको प्रणाम जरुर करना चाहिय|

अगहन मास में अपने गुरु को इष्ट को “ॐ दामोदराय नमः” कहते हुए प्रणाम करने की बड़ी भारी महिमा है

अगहन मास में शंख में तीर्थ का पानी भरो और घर में जो पूजा का स्थान है उसमें भगवान – गुरु उनके ऊपर से शंख घुमाकर भगवान का नाम बोलते हुए वो जल अपने घर की दीवारों पर छिडकाव करे उससे घर में शुद्धि बढ़ती है,शांति बढ़ती है, कलेश झगड़े दूर होते है।

मार्गशीर्ष की पूर्णिमा को चन्द्रमा की अवश्य ही पूजा की जानी चाहिए, क्योंकि इसी दिन चन्द्रमा को सुधा से सिंचित किया गया था।

इस दिन गौओं का नमक दिया जाए, तथा माता, बहिन, पुत्री और परिवार की अन्य स्त्रियों को एक-एक जोड़ा वस्त्र प्रदान कर सम्मानित करना चाहिए।

अगहन माह मे प्रात:काल भजन मण्डलियाँ भजन तथा कीर्तन करती हुई निकलती हैं।


सुनील कुमार

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