RSS के बारे मे कुछ रोचक तथ्य


अगर आपको जनना हे कि RSS क्या है, RSS की स्थापना कब हुई RSS के फायदे क्या है, RSS कैसे Join करें इन सब के बारे जनना चाहते है, तो आप बिलकुल सही जगह पर आये है इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको RSS के जूडी बहुत सी अनसुनी बातें और रोचक तथ्य के बारे में पूरी जानकारी देंगे।

RSS का फुल फॉर्म क्या है

RSS को (Rashtriya Swayamsevek Sangh) स्वयंसेवक संगठन कहा जाता है परन्तु इसे संघ या RSS के नाम से ज्यदा जाना जाता है|

RSS के फायदे

RSS प्रमुख “मोहन भागवत” के अनुसार RSS में किसी भी व्यक्ति को कोई फायदा नही है क्योंकि RSS एक संगठन नही है जिसमे व्यक्ति अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए शामिल हो इसमे केवल वे लोग ही शामिल हो सकते है जो समाज और राष्ट्र का लाभ चाहते हो। इसके कुछ व्यक्तिगत फायदे है जैसे :-

इससे आप जाति भेदभाव को भूल जायेंगे।
आप सीखेंगे की प्राकृतिक आपदाओं में कैसे लोगों की मदद करे।
 आपको अपनी महान संस्कृति और इतिहास पर गर्व होगा।
आपका रोलमॉडल Bollywood की हस्ती से स्वतंत्र सेनानी में चला जायेगा।
अगर आप रोज़ाना RSS शाखा में जा रहे है तो आप रोज़ाना नये लोगों से मिलेंगे।
RSS में रोजाना व्यायाम करने से आपका शारीर स्वस्थ रहेगा।
RSS में जाने से आप में राष्ट्रवादी और देश भक्ति की भावना जागृत हो जाती है।

RSS के साथ कैसे जुड़े

RSS में शामिल होने के लिए किसी भी प्रकार की कोई औपचारिक सदस्यता नही है RSS 18 साल से कम उम्र के बच्चों में शुरू से ही अपने विचारों और देश भावना भरने के लिए बाल भारती और बालगोकुल कार्यक्रम चला रही है, यह विश्व विद्यालयों में भी छात्रों को अपने संघ के प्रति आकर्षित करने के लिए कार्यक्रम चला रही है। अगर आप इस संघ से जुड़ना चाहते है या इसमे रहकर काम करना चाहते है, तो इसके लिए आप संघ के दैनिक, साप्ताहिक या मासिक गतिविधियों में शामिल हो कर इसका हिस्सा बन सकते है इसकी शाखा आपको हर क्षेत्र, विभाग, जिले, प्रांत और केंद्र पर मिल जाएगी इसमे सभी स्तर के संघ मंडली की बैठक होती है इसमे कार्यकर्ता व्यायाम, खेल, सूर्य नमस्कार, समता(परेड), गीत, भजन आदि कार्य करवाते है।

RSS में महिलाए क्यों नहीं होती

RSS में महिलाओं के शामिल नहीं होने के 2 कारण है,

1. RSS की शाखा सुबह और शाम को लगती है जो किसी House Wife के लिए सही नहीं है.

2. शाम की शाखा में बहुत भीड़ होती है, यहाँ पर बहुत से ऐसे खेल खेले जाते है, जिनमे शारीरिक श्रम ज्यदा होता है, जैसे एक दूसरे को धक्का देना, टांगो के बीच से निकलना, कबडी खेलते समय एक दूसरे पर गिरना और भी इस तरह के बहुत से खेल है.

यही दो कारण है महिलाओ के RSS में ना होने के|

RSS से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

1. आज हम आपको RSS से जूडी कुछ अनसुने और रोचक तथ्यों के बारे में बताने जा रहे है. जो सायद ही आपने कभी सुने होंगे|

2. BBC के अनुसार RSS विश्व का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन है इसका मुख्य उद्देश्य भारत को विश्व शक्ति और परम वैभव बनाना है इस संघ का निर्माण खोये हुए संस्कार और अपने बच्चों को हिन्दू संस्कार देना है और यह प्राकृतिक अपदाओ के आने पर सभी धर्म के लोगों की बढ़ चढ़कर मदद करता है।

3. RSS की 1925 में दशहरे के दिन डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी|

4. RSS का मुख्यालय नागपुर, महाराष्ट्र में है। आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत जी है जो ब्राह्मण जाति से संबंध रखते है। मोहन भागवत भारत के उन थोड़े से लोगो में से है जिन्हें Z+ सुरक्षा दी गई है।

5. दुनिया में शायद ही किसी संगठन की इतनी आलोचना की गई होगी, वह भी बिना किसी आधार के, RSS के ख़िलाफ़ लगा हर आरोप आख़िर में पूरी तरह कपोल-कल्पना और झूठ साबित हुआ है|

6. RSS की पहली शाखा में सिर्फ 5 लोग(संघी) शामिल हुए थे लेकिन आज देशभर में RSS की 60,000 से ज्यादा शाखाएँ है और एक शाखा में लगभग 100 स्वयंसेवक है। आज के समय में RSS दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संस्थान है।

7. 50 वर्षो के बाद सन 1975 में पूरे देश में आपातकाल की घोषणा की गयी थी उस समय संघ के सभी अधिकारियों और कार्यकर्ताओं को एकजुट होने पर रोक लगी थी|

8. आपातकाल के हटते ही यह संघ भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गयी और केंद्र में “मोरारजी देसाई” के प्रतिनिधित्व में मिली-जुली सरकार बनी। 1975 के बाद धीरे-धीरे इसका राजनीतिक महत्व बढ़ता गया और इसका झुकाव भारतीय जनता पार्टी जैसे राजनीतिक दल के रूप में हुआ।

9. RSS में महिलाएँ नही है, क्योकिं ये Allowed ही नही है। महिलाओं के लिए राष्ट्र सेविका समिती है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और राष्ट्र सेविका समिति दोनों अलग-अलग दल है लेकिन दोनो के विचार एक है। कई लोगो को ये गलतफहमी हो जाती है कि Sevika Smiti भी RSS का ही भाग है लेकिन ऐसा नही है।

10. 1971 में ओडिशा में आए भयंकर चंक्रवात से लेकर भोपाल की गैस त्रासदी तक, 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों से लेकर गुजरात के भूकंप, सुनामी की प्रलय, उत्तराखंड की बाढ़ और कारगिल युद्ध के घायलों की सेवा तक – संघ ने राहत और बचाव का काम हमेशा सबसे आगे होकर किया है|

11. RSS की शाखाओं में शाखा के अंत में एक प्रार्थना गाई जाती है नमस्ते सदा वत्सले यह संघ की स्थापना के 15 साल बाद गाई जाने लगी। इससे पहले एक श्लोक मराठी और एक श्लोक हिंदी में गाया जाता था।

12. RSS देश के लिए काम करता रहा है लेकिन इस पर आरोप भी लगते रहे है। RSS ने 1962 में भारत चीन के युद्ध में सरकार का पूरा साथ दिया था। इसी से खुश होकर नेहरू जी ने 1963 की गणतंत्र दिवस प्रेड में RSS को शामिल होने का न्योता दिया था। RSS, बाढ़ और प्राकृतिक आपदा आदि में भी देश-विदेश के लिए काम करता रहा है।

13. RSS के सदस्य किसी भी पद पर चले जाए, ज्यादातर काम खुद ही करते है जैसे: कपड़े धोना, भोजन बनाना आदि। और अपने से बड़े पदाधिकारी के प्रति बहुत ही आज्ञाकारी होते है।

14. RSS के प्रचारक को संघ के लिए काम करते समय तक अविवाहित रहना होता है। और दूसरे होते है संघ के विस्तारक, जो गृहस्थ जीवन में रहकर ही संघ से किशोरों को जोड़ने का काम करते है।

15. संघ का प्रचारक बनने के लिए किसी भी स्वयंसेवक को 3 साल तक OTC यानि ऑफिसर ट्रेनिंग कैंप में भाग लेना होता है। और शाखा प्रमुख बनने के लिए 7 से 15 दिन तक ITC यानि इंस्ट्रक्टर ट्रेनिंग कैंप में भाग लेना होता है।

16. ऐसा नही है कि RSS में सिर्फ हिंदू ही है, आपकी जानकारी के लिए बता दे कि RSS में मुस्लिम भी है। सन् 2002 से RSS एक नाम की विंग चलाती है। जिसमें लगभग 10,000 मुस्लिम है।

17. BJP के बड़े नेता जैसे अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी और नरेंद्र मोदी संघ के प्रचारक रह चुके है।

18. RSS का अपना अलग झंडा है, भगवा रंग का। सभी शाखाओं में यही झंडा फहराया जाता है। आरएसएस किसी आदमी को नही बल्कि भगवा ध्वज को ही अपना गुरू मानती है।

19. RSS की ड्रेस में काली टोपी, सफेद शर्ट, कपड़े की बेल्ट, खाकी निक्कर, चमड़े के जूते है। अब खाकी निकर की जगह पूरी पैंट कर दी गई है।

20. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सिर्फ भारत में ही नही बल्कि दुनिया के 40 देशो में है। विदेश में संघ की पहली शाखा मोंबासा, केन्या में लगी थी।

21. RSS की क्लास शाखा के रूप में लगती है। सुबह लगने वाली शाखा को ‘प्रभात शाखा‘ कहते है। शाम को लगने वाली शाखा को ‘सायं शाखा‘ कहते है। सप्ताह में एक या दो बार लगने वाली शाखा को ‘मिलन शाखा‘ कहते है। महीने में एक या दो बार लगने वाली शाखा को ‘संघ मंडली‘ कहते है।

हम उम्मीद करते है, कि आप सभी ने हमारे लिखी हुई पोस्ट पूरे ध्यान से और पूरी पढ़ी होगी, अगर आपको कहीं लगे कि यह बात ऐसे नहीं ऐसे होनी चाहिए थी, तो कृपया कमेंट के माध्यम से हमें बताएं धन्यवाद।

 


सुनील कुमार

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