यीशु मसीह के बारे में रोचक तथ्य और उनके अनमोल विचार


यीशु मसीह – निस्संदेह मानव इतिहास में सबसे मान्यता प्राप्त व्यक्ति। एक उपदेशक जिसने अपने समय से दुनिया को प्रभावित किया और अपने लोगों को अपने पापों से बचाने के लिए मौत को गले लगा लिया। नीचे सूचीबद्ध मानव मसीह के संरक्षक और हमारे परम उद्धारकर्ता यीशु मसीह के बारे में कुछ रोचक तथ्य हैं|

यीशु मसीह के बारे में रोचक तथ्य

पवित्र बाइबल में यीशु मसीह के जन्म की तारीख या समय का उल्लेख नहीं है। यह चौथी शताब्दी में था कि चर्च ने आखिरकार 25 दिसंबर को यीशु मसीह के जन्म दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया।

क्रिसमस के दौरान सजाए गए लकड़ी के बर्नस वास्तव में उनके जन्मस्थान का सही विवरण नहीं हैं। कई लोग मानते हैं कि उनका जन्म एक गुफा में हुआ था, जबकि कुछ का कहना है कि उनका जन्म उनके किसी रिश्तेदार जो की बहुत गरीब थे उनके यहाँ पर पैदा हुए थे। और बाइबल कभी भी यह नहीं बताती कि कितने राजाओं ने वास्तव में उनके जन्म पर दौरा किया था।

हां, यह सोचने और विश्वास करने में थोड़ा मुश्किल लग सकता है, लेकिन वास्तव में यह सच है कि यीशु को जन्म एक कुंवारी कन्या द्वारा हुआ था| क्योंकि वह पवित्र आत्मा द्वारा चमत्कारिक रूप से मदर मैरी के गर्भ में आए थे।

यहूदियों के रोमन राजा हेरोदेस ने आज्ञा दी थी कि आसपास के सभी राज्यों के नवजात शिशुओं को मार दिया जाए। क्योंकि उनमे से एक यीशु था| उसे डर था कि वह अपने सिंहासन को यहूदियों के एक नवजात राजा (यीशु) को न देना पड़े।

हम सभी जानते हैं कि भगवान के पुत्र यीशु को नीली आँखें, लंबी दाढ़ी और लंबी बाल वाले चित्रों में चित्रित किया गया है। लेकिन क्या इन चित्रों का एक स्पष्ट प्रभाव है, या केवल एक कलाकार की कल्पना है? पवित्र शास्त्र में वास्तव में उनके स्वरूप का कोई संदर्भ नहीं है और उनकी पहली पेंटिंग 15 वीं शताब्दी में उनकी मौत के लंबे समय बाद हुई इस प्रकार हमारे पास जानने का कोई तरीका नहीं है कि वह वास्तव में कैसा दिखता है।

प्रभु यीशु के पिता का जीवनjesus christ

मरियम के पति, यानी यीशु का दत्तक-पिता यूसुफ बढ़ई के काम में काफी हुनरमंद थे। वह खूब परिश्रम करते और अपने परिवार का गुज़ारा कर सका। आगे चलकर उसके पांच बेटे का जिक्र पवित्र पुस्तक बाइबल में मिलता है। उनकी दो बेटियां भी थीं।

मरियम की तरह यूसुफ भी आध्यात्मिक व्यक्ति थे। इसलिए, हर साल फसह( उस समय मनाया जाने वाला एक तरह का त्योहार) में अपने परिवार के साथ समय व्यतीत करते थे। उस समय मां मरियम को नौ महीने का गर्भ होने की वजह से बहुत तकलीफ हो रही थी, फिर भी उन्होंने और यूसुफ ने एक विद्वान कैसर का हुक्म मानते हुए, यूसुफ के पूर्वजों के शहर, बैतलहम तक की यात्रा की।

जब वे वहाँ पहुंचे, तो उस भीड़-भाड़वाले शहर में उन्हें ठहरने की कोई जगह नहीं मिली। इसलिए हालात से मजबूर होकर वे एक पशुशाला में ही ठहरे। वहीं पर यीशु का जन्म हुआ।

यीशु मसीह के अनमोल विचार

1. जिस तरह से पिता ने मुझसे प्रेम किया है ठीक उसी प्रकार मैंने भी तुमसे प्रेम किया है|

2. मनुष्यों को एक-दूसरे की सेवा करनी चाहिए । यही सच्ची ईश्वर सेवा है । स्वार्थ भावना का त्याग करो।

3. जो शरीर को मारते हैं, परंतु आत्मा को नहीं मार सकते, उनसे मत डरना, पर उससे डरो जो आत्मा और शरीर दोनों को नरक में कष्ट कर सकता है ।

4. जिनका भला करना चाहिये, य‍दि तुझ में शक्ति है, तो उनका भला करने से न रूकना।

5. मैं प्रभु से एक चीज मांगता हूँ, मुझे बस इसी की तलाश है: कि मैं आजीवन प्रभु के भवन में रह सकूँ, टकटकी लगा कर उनकी सुन्दरता देखता रहूँ और उनके मंदिर में उनकी प्रार्थना करता रहूँ।

6. ध्यान से देखो ! मैं दरवाजे पर खड़ा हूँ और आपका दरवाजा खटखटा रहा हूँ. अगर कोई मेरी आवाज सुनकर दरवाजा खोलता है तो मैं अंदर आऊंगा और उसके साथ भोजन करूँगा और वो मेरे साथ करेगा.

7. अपने प्राण की चिंता मत करो कि हम क्या खाएंगे, न अपने शरीर की कि क्या पहनेंगे, क्योंकि भोजन, प्राण और वस्त्र से बढ्‌कर शरीर है ।

8. भला उस आदमी को क्‍या लाभ, यदि वह पूरी दुनिया पा जाये और अपनी आत्‍मा खोने की पीड़ा सहे?

9. चखो और देखो कि ईश्वर अच्छा है; धन्य है वो जो उसकी शरण में जाता है।

10. अपने दिल को मुश्किल में मत डालो. गॉड पर भरोसा रखो और मुझ पर विश्वास करो.

11. जो तुम्हें सुनता है, वह मुझे सुनता है, जो तुम्हारा तिरस्कार करता है, वह मेरा तिरस्कार करता है और जो मेरा तिरस्कार करता है, वह उसका तिरस्कार करता है जिसने मुझे भेजा है ।

12. मैं मार्ग हूँ, सत्‍य हूँ, और जीवन हूँ। मुझसे हुए बिना कोई पिता तक नहीं पहुँचता।

13. और हम जानते हैं कि हर चीज में भगवान् उनके भले की लिए काम करता है जो उससे प्रेम करते हैं, जिन्हें उनके मकसद के लिए बुलाया गया होता है।

14. उनको जो खुद की प्रशंसा करते है उनको विनम्र किया जायेगा और जो खुद को विनम्र करते है उनकी प्रशंसा होगी|

15. कृपा और सच्चाई तुझसे अलग न होने पाएं, वरन उनको अपने गले का हार बनाना और अपनी हृदय रूपी पट्‌टिका पर लिखना । ऐसे करने से तू परमेश्वर और मनुष्य दोनों का अनुग्रह पाएगा । तू अति बुद्धिमान होगा ।

16. यदि किसी को किसी पर दोष देने का कोई कारण हो तो एक दूसरे की सह लो और एक दूसरे के अपराध क्षमा करो, जैसे प्रभु ने तुम्‍हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी करो। इन सब के ऊपर प्रेम को जो सिद्धता का कटिबन्‍ध है बान्‍ध लो।

17. यदि गॉड हमारे साथ है, तो कौन हमारे खिलाफ हो सकता है?

18. गॉड इस संसार से इतना प्रेम करते है की उन्होंने अपना इकलौता पुत्र दे दिया. वह जो इसमें यकीन करेगा वह मरेगा नहीं बल्कि उसका जीवन अमर हो जायेगा|

19. वह मनुष्य ही धन्य है जो बुद्धि पाए और समझ प्राप्त करे, क्योंकि बुद्धि की प्राप्ति चांदी की प्राप्ति से बड़ी है । उसका लाभ सोने के लाभ से भी उत्तम है और जितनी वस्तुओं की तू लालसा करता है, उनमें से कोई शी उसके तुल्य न ठहरेगी ।

20. आप जैसे-जैसे उसमे भरोसा करें, आशा का देवता आपको सारी खुशियों और शांति से भर दे, ताकि आपके भीतर पवित्र आत्मा की शक्ति के द्वारा उम्मीद का अतिप्रवाह हो सके।

21. जो तुमसे मांगता है उसे दे दो और जो तुम्हारा सामान ले जाए उसे दुबारा मत पूछो. जैसा व्यवहार आप उन लोगो से चाहते हो वैसा ही व्यवहार उनके साथ करो|

22. जिस किसी ने मेरे नाम के लिए अपने घरों या भाइयों, बहनों या पिता, माता या लड़के-बच्चों, खेतों को छोड़ दिया है । उसको सौ गुना मिलेगा और वह अनंत जीवन का अधिकारी होगा ।

23. हम परमेश्वर की संताने हैं, और हम जो होंगे वो अभी ज्ञात नहीं हो सका है! लेकिन हम जानते हैं कि जब मसीह प्रकट होंगे, हम उनकी तरह होंगे, क्योंकि हम उन्हें उस तरह देख पायेंगे जैसे वो हैं|

24. मैं आपको एक सच बताता हूँ.. एक अमीर व्यक्ति के लिए स्वर्ग में प्रवेश करना बहुत कठिन है. मैं एक बार फिर कहता हूँ.. अमीर व्यक्ति के लिए स्वर्ग में प्रवेश करने से आसान काम तो ऊंट का सुई के छेद से निकलना है|

25. मज़बूत और साहसी बनें। उनकी वजह से डरें या भयभीत न हों, क्योंकि परमेश्वर तुम्हारे साथ जाता है; वह तुम्हें न कभी छोड़ेगा, न कभी त्यागेगा।

26. मैं तुमसे इसलिए कहता हूँ.. मांगों तुम्हे दे दिया जायेगा, खोजो तुम्हे मिल जायेगा, खटखटाओ दरवाजे खुल जायेंगे|

27. तुमसे कहता हूँ की अपने दुश्मनो से प्यार करो और उनके लिए प्रार्थना करो जो तुमको सताते है. इससे तुम उस पिता की संतान बन जाओगे तो स्वर्ग में है. वह अपना सूर्य बुराई और अच्छाई दोनों पर डालता है और न्यायी व अन्यायी दोनों पर अपनी वर्षा करता है|

28. तुम्हे व्यभिचारिता नहीं करनी चाहिए, तुम्हे हत्या नहीं करनी चाहिए, तुम्हे चुराना नहीं चाहिए, तुम्हे लालच नहीं करनी चाहिए और तुम्हे अपने पडोसी को अपना समझकर प्रेम करना चाहिए|

29. अगर आप एकदम सही होना चाहते हो तो जाओ अपनी सारी सम्पत्ति को गरीबों मे बाँट दो. तुम्हे स्वर्ग का खजाना मिल जायेगा|


सुनील कुमार

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