क्यों मनाई जाती है नाग पंचमी/नाग पंचमी का महत्व


नाग पंचमी हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है. नाग भगवान शिवजी के अंग भूषण माने गए हैं। नागपंचमी के दिन शिवजी के साथ ही नागों की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है| हिन्दू पंचांग के अनुसार सावन माह की शुक्ल पक्ष के पंचमी को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता या सर्प की पूजा की जाती है और उन्हें दूध पिलाया जाता है। नागपंचमी के ही दिन अनेकों गांव व कस्बों में कुश्ती का आयोजन होता है जिसमें आसपास के पहलवान भाग लेते हैं। गाय, बैल आदि पशुओं को इस दिन नदी, तालाब में ले जाकर नहलाया जाता है। इस दिन अष्टनागों की पूजा की जाती है।

अक्सर लोगों के दिमाग में बात आती है कि सर्प हमारे शत्रु हैं लेकिन फिर भी लोग उनकी पूजा करते हैं. आखिर जिस सर्प से इंसानों को इतना डर लगता है उसकी पूजा क्यों की जाती है? nag panchmi
भारत एक कृषिप्रधान देश है और सांप हमारे खेतों की रक्षा करते हैं क्योंकि यह फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले चूहों और कीड़ों को खा लेते हैं इसलिए उन्हें क्षेत्रपाल भी कहा जाता है और इसी कारण लोग उनकी पूजा भी करते हैं।

सांप सुगंध प्रिय होती है और इसी कारण हमारे पुराणों में सर्प को काफी ऊंचा स्थान दिया गया है इस कारण भी लोग उन्हें पूजते हैं।

भगवान शिव के आभूषण लोग सर्प को तीनों लोक के स्वामी भगवान शिव के आभूषण के रूप में देखते हैं इसलिए इनकी पूजा करते हैं।

समु्द्र मंथन देव-दानवों के बीच जब समु्द्र मंथन हुआ था तब शेषनाग के ही द्वारा यह संभव हो पाया था और इस मंथन से ही अमृत निकला था इसलिए भी नागों की पूजा होती है।

भगवान विष्णु भी शेषनाग की शय्या में विश्राम करते हैं इसलिए भी इनकी पूजा होती है।

कृतज्ञ बुद्धि समग्र सृष्टि के हित के लिए बरसते बरसात के कारण निर्वासित हुआ सांप जब हमारे घर में अतिथि बनकर आता है तब उसे आश्रय देकर कृतज्ञ बुद्धि से उसका पूजन करना हमारा कर्त्तव्य हो जाता है। इस तरह नाग पंचमी का उत्सव सावन महीने में रखा गया है।


सुनील कुमार

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