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पूजा  के अंत में हम सभी देवी – देवताओं की आरती करते हैं। आरती पूजन के अन्त में हम इष्टदेवी ,इष्टदेवता की प्रसन्नता के हेतु की जाती है। इसमें इष्टदेव को दीपक दिखाने के साथ उनका स्तवन तथा गुणगान किया जाता है। यह देवी – देवताओं  के गुणों की प्रशंसा गीत है। आरती आम तौर पर एक पूजा या भजन सत्र के अंत  में किया जाता है। यह पूजा समारोह के एक भाग के रूप में गाया जाता है।

हिंदू धर्म में कृष्ण जी को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को गीता का ज्ञान देकर एक बहुत ही अहम भूमिका निभाई थी। जन्माष्टमी के पावन पर्व पर इनकी विशेष पूजा आराधना की जाती है। आज हम आपके साथ कृष्ण जी की आरती हिन्दी तथा इंग्लिश मे साझा कर रहे है आप अपने सुविधा अनुसार कोई भी माध्यम चुन सकतें है|

श्रीकृष्ण जी की आरती (1) (Lord Krishna Aarti in Hindi)

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥

गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला ।
श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला ।

गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली ।
लतन में ठाढ़े बनमाली;
भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक;
ललित छवि श्यामा प्यारी की ॥ श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की…

कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं ।
गगन सों सुमन रासि बरसै;
बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग, ग्वालिन संग;
अतुल रति गोप कुमारी की ॥ श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की…

जहां ते प्रकट भई गंगा, कलुष कलि हारिणि श्रीगंगा ।
स्मरन ते होत मोह भंगा;
बसी सिव सीस, जटा के बीच, हरै अघ कीच;
चरन छवि श्रीबनवारी की ॥ श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की…

चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू ।
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू;
हंसत मृदु मंद,चांदनी चंद, कटत भव फंद;
टेर सुन दीन भिखारी की ॥ श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की…

Lord Krishna Aarti in English (1)

Aarti kunj bihari ki, shri girdhar krishna murari ki

Gale mein baijanti mala, bajave murali madhur bala
Shravan mein kundal jhalakala

Nand ke anand nand lala
Gagan sam ang kanti kali, radhika chamak rahi aali

Ratan mein thadhe banamali
Bhramar si alak, kasturi tilak, chandra si jhalak

Lalit chhavi shyama pyari ki
Shri giradhar krishnamuraari ki

Aarti kunj bihari ki , Shri girdhar krishna murari ki

Kanakmay mor mukut bilse, devata darsan ko tarse
Gagan so suman raasi bares

Baje murchang, madhur mridang, gwaalin sang
Atual rati gop kumaari ki Shri giradhar krishna murari ki

Aarti kunj bihari ki, Shri girdhar krishna murari ki

Jahaan se pragat bhayi ganga, kalush kali haarini shri ganga,
Smaran se hot moh bhanga

Basi shiv shish, jataa ke beech, harei agh keech;
Charan chhavi shri banvaari ki. Shri giradhar krishnamuraari ki…

Aarti kunj bihari ki, Shri girdhar krishna murari ki

Chamakati ujjawal tat renu, baj rahi vrindavan benu
Chahu disi gopi gwaal dhenu

Hansat mridu mand, chandani chandra, katat bhav phand
Ter sun deen bhikhaari ki, Shri giradhar krishnamuraari ki

Aarti kunj bihari ki, Shri girdhar krishna murari ki

श्रीकृष्ण जी की आरती (2) (Lord Krishna Aarti in Hindi)

जय श्रीकृष्ण हरे, प्रभु जय श्रीकृष्ण हरे।
भक्तजनन के दुख्र सारे पल में दूर करे।

परमानन्द मुरारी मोहन गिरधारी।
जय रस रास बिहारी जय जय गिरधारी।

कर कंकन कटि सोहत कानन में बाला।
मोर मुकुट पीताम्बर सोहे बनमाला।

दीन सुदामा तारे दरिद्रों के दुख टारे।
गज के फंद छुड़ाए भवसागर तारे।

हिरण्यकश्यप संहारे नरहरि रुप धरे।
पाहन से प्रभु प्रगटे जम के बीच परे।

केशी कंस विदारे नल कूबर तारे।
दामोदर छवि सुंदर भगतन के प्यारे।

काली नाग नथैया नटवर छवि सोहे।
फन-फन नाचा करते नागन मन मोहे।

राज्य उग्रसेन पायो माता शोक हरे।
द्रुपद सुता पत राखी करुणा लाज भरे।

जय जय श्री कृष्ण हरे
ॐ जय श्री कृष्ण हरे

Lord Krishna Aarti in English  (2)

Om Jai Shri Krishna Hare,
Prabhu Jai Shri Krishna Hare,
Bhaktan Ke Dukh Sare Pal Me Dur Kare || Om Jai ||

Parmanand Murari Mohan Girdhari
Jai Ras Raas Bihari Jai Jai Girdhaari || Om Jai ||

Kar Kankan Koti Sohat Kaanan Me Baala
Mor Mukut Pitambar Sohe Banmala || Om Jai ||

Deen Sudhama Taare Daridro Ke Dukh Taare
Gaj Ke Fand Chudaye Bhav Saagar Taare || Om Jai ||

Hiranyakashyap Sanhaare Narhaari Rup Dhare
Paahan Se Prabhu Pragate Jam Ke Beech Pare || Om Jai ||

Keshi Kans Vidaare Nal Kuber Taare
Daamoad Chavi Sundar Bhagtan Ke Pyare || Om Jai ||

Kali Naag Nathaiya Natwar Chhavi Sohe
Fan Fan Naachaa Karte Naagan Mann Mohe || Om Jai ||

Rajya Ugrasen Paaye Maata Shok Hare
Drupad Suta Pat Raakhi Karuna Laaj Bhare || Om Jai ||

कैसे करें भगवान श्रीकृष्ण की सच्ची आरती ?

यह बात तो सब जानते ही है की संसार पंच महाभूतों—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश से बना है। आरती में ये पांच वस्तुएं (पंच महाभूत) रहते है—

  1. पृथ्वी की सुगंध—कपूर
  2. जल की मधुर धारा—घी
  3. अग्नि—दीपक की लौ
  4. वायु—लौ का हिलना
  5. आकाश—घण्टा, घण्टी, शंख, मृदंग आदि की ध्वनि

इस प्रकार सम्पूर्ण संसार से ही भगवान की आरती होती है।

मानव शरीर से भी कर सकतें है सच्ची आरती

मानव शरीर भी पंचमहाभूतों से बना है । मनुष्य अपने शरीर से भी ईश्वर की आरती कर सकता है ।

जाने कैसे ?

अपने देह का दीपक, जीवन का घी, प्राण की बाती, और आत्मा की लौ सजाकर भगवान के इशारे पर नाचना—यही सच्ची आरती है। इस तरह की सच्ची आरती करने पर संसार का बंधन छूट जाता है और जीव को भगवान के दर्शन होने लगते हैं।