भगवान श्री राम जी की आरती हिंदी और इंग्लिश मे {2020}


पूजा  के अंत में हम सभी देवी – देवताओं की आरती करते हैं। आरती पूजन के अन्त में हम इष्टदेवी ,इष्टदेवता की प्रसन्नता के हेतु की जाती है। इसमें इष्टदेव को दीपक दिखाने के साथ उनका स्तवन तथा गुणगान किया जाता है। यह देवी – देवताओं  के गुणों की प्रशंसा गीत है। आरती आम तौर पर एक पूजा या भजन सत्र के अंत  में किया जाता है। यह पूजा समारोह के एक भाग के रूप में गाया जाता है।

भगवान श्री राम को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के नाम को ही मंत्र माना जाता है। “राम” नाम का जाप करने मात्र से मनुष्य के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। आज हम आपके साथ श्री राम जी की आरती हिन्दी तथा इंग्लिश मे साझा कर रहे है आप अपने सुविधा अनुसार कोई भी माध्यम चुन सकतें है|

श्री राम जी की आरती ( Lord Shri Ram Aarti in Hindi)

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं ।
नवकंज लोचन, कंजमुख, करकुंज, पदकंजारुणं॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं ।
श्री राम श्री राम….
कंदर्प अगणित अमित छबि, नवनीलनीरद सुन्दरं ।
पट पीत मानहु तडीत रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरं ॥

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं ।
श्री राम श्री राम….
भजु दीनबंधु दिनेश दानवदै त्यवंशनिकंदनं ।
रघुनंद आंनदकंद कोशलचंद दशरथनंदनं ॥

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं ॥
श्री राम श्री राम…
सिर मुकुट कूंडल तिलक चारु उदारु अंग विभुषणं ।
आजानु भुजा शरा चाप धरा, संग्राम जित खर दुषणं ॥
भुजा शरा चाप धरा, संग्राम जित खर दुषणं ॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं
इति वदित तुलसीदास शंकरशेषमुनिमनरंजनं ।
मम ह्रदयकंजनिवास कुरु, कमदि खल दल गंजनं ॥

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं ।
नवकंज लोचन, कंजमुख, करकुंज, पदकंजारुणं ॥
श्री राम श्री राम

Lord Ram Aarti in English 

Shri Ramachandra kripalu bhaju man,
haran bhav bhai darunam.
Nav kanj lochan, kanj mukh,
kar kanj pad kanjarunam
Kandarp aganit amit chhavi,
Navvnil jiraj sundaram,
pat pit manahun tadit ruchi,
Suchi naumi Janakasutavaram.
Bhuj din bandu dinesh danav,
dusht dalan nikandanam,
Raghunand anand kand Kaushal,
chandra Dashrath nandanam.
Sir krit kundaltilak charu,
udar ang vibhushanam,
Ajanubhuj san-chap dhar,
sangramajit kharadushanam.
iti badit Tulasidas Shankar,
shesh muni man ranjanam,
Mam hridai kanj nivas kar,
kamadi khal dal bhanjanam.
Manujahi racheu milahi so bar sahaj sundarsanvaro,
Karuna nidhan sujan silu sanehu janat ravaro.
Ehi bhanti Gauri asis suni,
Siya sahit hiya harshin ali,
TuIsi bhavanihin puji-puni mudit man mandir chali.
Jani Gauri anukal,
Siya hiya harshu na jai kahi,
Manjul mangal mul,
bam ang pharkan lage

कैसे करें भगवान श्री राम की सच्ची आरती ?

यह बात तो सब जानते ही है की संसार पंच महाभूतों—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश से बना है। आरती में ये पांच वस्तुएं (पंच महाभूत) रहते है—

  1. पृथ्वी की सुगंध—कपूर
  2. जल की मधुर धारा—घी
  3. अग्नि—दीपक की लौ
  4. वायु—लौ का हिलना
  5. आकाश—घण्टा, घण्टी, शंख, मृदंग आदि की ध्वनि

इस प्रकार सम्पूर्ण संसार से ही भगवान की आरती होती है।

मानव शरीर से भी कर सकतें है सच्ची आरती

मानव शरीर भी पंचमहाभूतों से बना है । मनुष्य अपने शरीर से भी ईश्वर की आरती कर सकता है ।

जाने कैसे ?

अपने देह का दीपक, जीवन का घी, प्राण की बाती, और आत्मा की लौ सजाकर भगवान के इशारे पर नाचना—यही सच्ची आरती है। इस तरह की सच्ची आरती करने पर संसार का बंधन छूट जाता है और जीव को भगवान के दर्शन होने लगते हैं।


सुनील कुमार

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