शिव जी की आरती हिंदी और इंग्लिश मे {2020}


पूजा  के अंत में हम सभी देवी – देवताओं की आरती करते हैं। आरती पूजन के अन्त में हम इष्टदेवी ,इष्टदेवता की प्रसन्नता के हेतु की जाती है। इसमें इष्टदेव को दीपक दिखाने के साथ उनका स्तवन तथा गुणगान किया जाता है। यह देवी – देवताओं  के गुणों की प्रशंसा गीत है। आरती आम तौर पर एक पूजा या भजन सत्र के अंत  में किया जाता है। यह पूजा समारोह के एक भाग के रूप में गाया जाता है।

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हिन्दू धर्म में भगवान शिव को त्रिदेवों में गिना जाता है। भगवान शिव को कोई रुद्र तो कोई भोलेनाथ तो कोई भोले नाथ के नाम से पुकारता है। माना जाता है कि भगवान शिव भक्त की भक्ति मात्र से प्रसन्न हो जाते हैं। भगवान शिव की पूजा में विशेष नियम नहीं होते।भगवान शिव का मंत्र भी बेहद आसान है। भगवान शिव की आराधना के लिए निम्न आरती का पाठ करना चाहिए। आज हम आपके साथ भगवान शिव जी की आरती हिन्दी तथा इंग्लिश मे साझा कर रहे है आप अपने सुविधा अनुसार कोई भी माध्यम चुन सकतें है|

शिव जी की आरती (Lord Shiva Aarti in Hindi)

ॐ जय शिव ओंकारा जय शिव ओंकारा
ब्रह्म विष्णु सदां शिव अर्द्धांगी धारा || ॐ हर हर महादेव ||

एकानन चतुरानन पंचानन राजै
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजै || ॐ हर हर महादेव ||

दो भुज चारू चतुर्भुज दश भुजते सोहे
तीनो रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे || ॐ हर हर महादेव ||

अक्षयमाला बन माला रुंड माला धारी
त्रिपुरारी असुरारी शाशिमाला धारी || ॐ हर हर महादेव ||

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे
सनकादिक गरुडादिक भूतादिक संगे || ॐ हर हर महादेव ||

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कर के मध्य कमंडल चक्रत्रिशुल धरता
सुखकर्ता दुखहर्ता जग-पालन करता || ॐ हर हर महादेव ||

ब्रम्हा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका
प्राणावकशर में शोभित तीनो एका || ॐ हर हर महादेव ||

त्रिगुण स्वामी की आरती जो कोई नर गावे
कहत शिवानन्द स्वामी मन वांछित फल पावे || ॐ हर हर महादेव ||

Lord Shiva  Aarti in English Text

Jai Shiv Omkara, Prabhu Jai Shiv Omkara
Brahma Vishnu Sadaashiv Ardhangi Dhara || Om Har Har Mahadev ||

Ekanan, Chaturanan, Panchaanan Raje,
Hansasan Garudasan Vrishvahan Saje || Om Har Har Mahadev ||

Do Bhuj, Charu Chaturbhui Dashmukh Ati Sohe
Tinon Rup Nirakhte Tribhuvan Janmohe || Om Har Har Mahadev ||

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Akshyamaala Banamala Rund Mala Dhari
Chandan Mrigmad Sohai, Bhale Shubhkari || Om Har Har Mahadev ||

Shvetambar Pitambar Bagambar Ange,
Brahmadik Sankaadik Pretadik Sange || Om Har Har Mahadev ||

Kar Madhye Kamandalu Au Trishul Bhari,
Sukhkari Dukhahaari Jagpalankari || Om Har Har Mahadev ||

Brahma Vishnu Sadashiv Janat Avivekaa,
Pranavakshar Men Shobhit Ye Tinon Eka || Om Har Har Mahadev ||

Trigun Svaami Ki Arti Jo Koi Nar Gave
Kahat Shivanand Svami Man Vaanchhit Phal Pave || Om Har Har Mahadev ||

शिव जी का मंत्र

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारं |
सदा वसन्तं ह्रदयाविन्दे भंव भवानी सहितं नमामि ॥
जय शिव ओंकारा हर ॐ शिव ओंकारा |
ब्रम्हा विष्णु सदाशिव अद्धांगी धारा ॥

ॐ जय शिव ओंकारा……
एकानन चतुरानन पंचांनन राजे |
हंसासंन ,गरुड़ासन ,वृषवाहन साजे॥

ॐ जय शिव ओंकारा……
दो भुज चारु चतुर्भज दस भुज अति सोहें |
तीनों रुप निरखता त्रिभुवन जन मोहें॥

ॐ जय शिव ओंकारा……
अक्षमाला ,बनमाला ,रुण्ड़मालाधारी |
चंदन , मृदमग सोहें, भाले शशिधारी ॥

ॐ जय शिव ओंकारा……
श्वेताम्बर,पीताम्बर, बाघाम्बर अंगें
सनकादिक, ब्रम्हादिक ,भूतादिक संगें

ॐ जय शिव ओंकारा……
कर के मध्य कमड़ंल चक्र ,त्रिशूल धरता |
जगकर्ता, जगभर्ता, जगसंहारकर्ता ॥

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ॐ जय शिव ओंकारा……
ब्रम्हा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका |
प्रवणाक्षर मध्यें ये तीनों एका ॥

ॐ जय शिव ओंकारा……
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रम्हचारी |
नित उठी भोग लगावत महिमा अति भारी ॥

ॐ जय शिव ओंकारा……
त्रिगुण शिवजी की आरती जो कोई नर गावें |
कहत शिवानंद स्वामी मनवांछित फल पावें ॥

ॐ जय शिव ओंकारा…..
जय शिव ओंकारा हर ॐ शिव ओंकारा|
ब्रम्हा विष्णु सदाशिव अद्धांगी धारा॥
ॐ जय शिव ओंकारा

कैसे करें भगवान शिव की सच्ची आरती ?

यह बात तो सब जानते ही है की संसार पंच महाभूतों—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश से बना है। आरती में ये पांच वस्तुएं (पंच महाभूत) रहते है—

  1. पृथ्वी की सुगंध—कपूर
  2. जल की मधुर धारा—घी
  3. अग्नि—दीपक की लौ
  4. वायु—लौ का हिलना
  5. आकाश—घण्टा, घण्टी, शंख, मृदंग आदि की ध्वनि

इस प्रकार सम्पूर्ण संसार से ही भगवान की आरती होती है।

मानव शरीर से भी कर सकतें है सच्ची आरती

मानव शरीर भी पंचमहाभूतों से बना है । मनुष्य अपने शरीर से भी ईश्वर की आरती कर सकता है ।

जाने कैसे ?

अपने देह का दीपक, जीवन का घी, प्राण की बाती, और आत्मा की लौ सजाकर भगवान के इशारे पर नाचना—यही सच्ची आरती है। इस तरह की सच्ची आरती करने पर संसार का बंधन छूट जाता है और जीव को भगवान के दर्शन होने लगते हैं।


सुनील कुमार

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