सूर्य देव जी की आरती हिंदी और इंग्लिश मे {2020}


पूजा  के अंत में हम सभी भगवानो की आरती करते हैं। आरती पूजन के अन्त में हम इष्टदेवता की प्रसन्नता के हेतु की जाती है। इसमें इष्टदेव को दीपक दिखाने के साथ उनका स्तवन तथा गुणगान किया जाता है। यह एक देवता के गुणों की प्रशंसा गीत है। आरती आम तौर पर एक पूजा या भजन सत्र के अंत में किया जाता है। यह पूजा समारोह के एक भाग के रूप में गाया जाता है।

हिन्दू धर्म के अनुसार भगवान सूर्य देव एक मात्र ऐसे देव हैं जो साक्षात दिखाई पड़ते हैं। सूर्य देव के प्रातः दर्शन कर जल चढ़ाने से सफलता, शांति और शक्ति की प्राप्ति होती है। आज हम आपके साथ सूर्य देव जी की आरती हिन्दी तथा इंग्लिश मे साझा कर रहे है आप अपने सुविधा अनुसार कोई भी माध्यम चुन सकतें है|

सूर्य देव की आरती (Surya Dev Aarti In Hindi) (1)

ऊँ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
जगत् के नेत्र स्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।
धरत सब ही तव ध्यान, ऊँ जय सूर्य भगवान।।

सारथी अरूण हैं प्रभु तुम, श्वेत कमलधारी। तुम चार भुजाधारी।।
अश्व हैं सात तुम्हारे, कोटी किरण पसारे। तुम हो देव महान।। ऊँ जय सूर्य ……

ऊषाकाल में जब तुम, उदयाचल आते। सब तब दर्शन पाते।।
फैलाते उजियारा जागता तब जग सारा। करे सब तब गुणगान ।। ऊँ जय सूर्य ……

संध्या में भुवनेश्वर अस्ताचल जाते। गोधन तब घर आते।।
गोधुली बेला में हर घर हर आंगन में। हो तव महिमा गान ।। ऊँ जय सूर्य ……

देव दनुज नर नारी ऋषी मुनी वर भजते। आदित्य हृदय जपते।।
स्त्रोत ये मंगलकारी, इसकी है रचना न्यारी। दे नव जीवनदान ।। ऊँ जय सूर्य ……

तुम हो त्रिकाल रचियता, तुम जग के आधार। महिमा तब अपरम्पार।।
प्राणों का सिंचन करके भक्तों को अपने देते। बल बृद्धि और ज्ञान ।। ऊँ जय सूर्य ……

भूचर जल चर खेचर, सब के हो प्राण तुम्हीं। सब जीवों के प्राण तुम्हीं।।
वेद पुराण बखाने धर्म सभी तुम्हें माने। तुम ही सर्व शक्तिमान ।। ऊँ जय सूर्य ……

पूजन करती दिशाएं पूजे दश दिक्पाल। तुम भुवनों के प्रतिपाल।।
ऋतुएं तुम्हारी दासी, तुम शाश्वत अविनाशी। शुभकारी अंशमान ।। ऊँ जय सूर्य ……

ऊँ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
जगत के नेत्र रूवरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।।
धरत सब ही तव ध्यान, ऊँ जय सूर्य भगवान।।

Lord Surya Dev Aarti in English (1)

Om Jai Surya Bhagwan lJai Ho Tinkar Bhagwan l
Jagat Ke Netra Swaroopa lTum Ho Triguna Swaroopa l

Dharata Sabahi Sab Dhyan llOm Jai Surya Bhagwan…
Sarathi Arun Hai Prabhu Tum lShweta Kamaladhari l

Tum Char Bhuja Dhari lAshwa Hai Saath Tumharey l

Koti Kirana Pasaarey lTum Ho Dev Mahan ll
Om Jai Surya Bhagwan….

Usha Kaal Mein Jab Tum lUdaya Chal Aatey l
Tab Sab Darshan Paatey lPhailaatey Ujiaara l
Jaagta Tab Jag Saara lKarey Tab Sab Gun Gaan ll
Om Jai Surya Bhagwan ….

Bhoochar Jalchar Khechar lSab Ke Ho Pran Tumhi l
Sab Jeevo Ke Pran Tumhi lVed Puraan Bhakhaaney l
Dharm Sabhi Tumhe Maaney lTum Hi Sarva Shaktimaan ll
Om Jai Surya Bhagwan….

Pujan Karti Vishayein lPujey Sab Ek Paar l
Tum Bhuvno Ke Pratipaal lRituyein Tumhari Daasi l
Tum Shashaka Avinashi lShubhkari Anshumaan ll
Om Jai Surya Bhagwan

सूर्य देव की आरती (Surya Dev Aarti In Hindi) (2)

जय कश्यप नन्दन, ऊँ जय अदिति नन्दन।
द्दिभुवन तिमिर निकंदन, भक्त हृदय चन्दन॥ ऊँ जय….
जय सप्त अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी।
दु:खहारी, सुखकारी, मानस मलहारी॥ ऊँ जय….
जय सुर मुनि भूसुर वन्दित, विमल विभवशाली।
अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥ ऊँ जय….
जय सकल सुकर्म प्रसविता, सविता शुभकारी।
विश्व विलोचन मोचन, भव-बंधन भारी॥ ऊँ जय…
जय कमल समूह विकासक, नाशक त्रय तापा।
सेवत सहज हरत अति, मनसिज संतापा॥ ऊँ जय…
जय नेत्र व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा हारी।
वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥ ऊँ जय…
जय सूर्यदेव करुणाकर, अब करुणा कीजै।
हर अज्ञान मोह सब, तत्वज्ञान दीजै॥ जय

Lord Surya Dev Aarti in English (2)

Om, jai kashyapa nandana, prabhu, jai aditi nandan l
tribhuvana timira nikandana, bhakta hridaya candan ll. Om, jai …
sapta ashva ratha rajati, eka cakra dhari l
dukhahari sukhakari, manasa mala hari ll Om, jai
Sura muni bhusura vandita, vimala vibhava-shali l
aghadala dalana, divakara, divya kirana mali ll Om, jai …
Sakala sukarma prasavita, Savita subha kari l
vishva vilocana mocana, bhava bandhana bhari ll Om, jai …
Kamala samuha vikashaka, nashaka traya tapa l
sevata sahaja rahata ati, manasija santapa. ll Om, jai …
Netra vyadhi hara, suravara, bhu pira hari l
vrishti vimocana santata, parahita vrata dhari ll Om, jai …
Suryadeva, karuna-kara, aba karuna kije l
hara ajnana moha saba, tattva-jnana dije ll Om, jai

कैसे करें भगवान की सच्ची आरती ?

यह बात तो सब जानते ही है की संसार पंच महाभूतों—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश से बना है। आरती में ये पांच वस्तुएं (पंच महाभूत) रहते है—

  1. पृथ्वी की सुगंध—कपूर
  2. जल की मधुर धारा—घी
  3. अग्नि—दीपक की लौ
  4. वायु—लौ का हिलना
  5. आकाश—घण्टा, घण्टी, शंख, मृदंग आदि की ध्वनि

इस प्रकार सम्पूर्ण संसार से ही भगवान की आरती होती है।

मानव शरीर से भी कर सकतें है सच्ची आरती

मानव शरीर भी पंचमहाभूतों से बना है । मनुष्य अपने शरीर से भी ईश्वर की आरती कर सकता है ।

जाने कैसे ?

अपने देह का दीपक, जीवन का घी, प्राण की बाती, और आत्मा की लौ सजाकर भगवान के इशारे पर नाचना—यही सच्ची आरती है। इस तरह की सच्ची आरती करने पर संसार का बंधन छूट जाता है और जीव को भगवान के दर्शन होने लगते हैं।


सुनील कुमार

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