श्री विष्णु जी की आरती हिंदी और इंग्लिश मे {2020}


पूजा  के अंत में हम सभी देवी – देवताओं की आरती करते हैं। आरती पूजन के अन्त में हम इष्टदेवी ,इष्टदेवता की प्रसन्नता के हेतु की जाती है। इसमें इष्टदेव को दीपक दिखाने के साथ उनका स्तवन तथा गुणगान किया जाता है। यह देवी – देवताओं  के गुणों की प्रशंसा गीत है। आरती आम तौर पर एक पूजा या भजन सत्र के अंत  में किया जाता है। यह पूजा समारोह के एक भाग के रूप में गाया जाता है।

भगवान विष्णु के अवतार : शास्त्रों में विष्णु के 24 अवतार बताए हैं, लेकिन प्रमुख दस अवतार माने जाते हैं- मतस्य, कच्छप, वराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बु‍द्ध और कल्कि। आज हम आपके साथ विष्णु जी की आरती हिन्दी तथा इंग्लिश मे साझा कर रहे है आप अपने सुविधा अनुसार कोई भी माध्यम चुन सकतें है|

विष्णु जी की आरती (Lord Vishnu Aarti in Hindi)

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे | भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे ||
ॐ जय जगदीश हरे…

जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का | सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का ||
ॐ जय जगदीश हरे…

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ किसकी | तुम बिनु और न दूजा, आस करूँ जिसकी ||
ॐ जय जगदीश हरे…

तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी | पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी ||
ॐ जय जगदीश हरे…

तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता | मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता ||
ॐ जय जगदीश हरे…

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति | किस विधि मिलूँ दयामय! तुमको मैं कुमति ||
ॐ जय जगदीश हरे…

दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे | अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे ||
ॐ जय जगदीश हरे…

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा | श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा ||
ॐ जय जगदीश हरे…

Lord Vishnu Aarti in English 

Om jai Jagdish hare, Swami jai Jagdish hare,
Bhakt jano ke sankat Dass jano ke sankat, Kshan mein door kare,
Om jai Jagdish hare…

Jo dhyave phal pave, Dukh bin se mun ka, Swami dukh bin se mun ka
Sukh sampati ghar aave, Kasht mite tun ka,
Om jai Jagdish hare…

Maat pita tum mere, Sharan gahu mein kiski, Swami sharan gaho kiski
Tum bin aur na dooja, Aas karun mein jiski,
Om jai Jagdish hare

Tum puran Parmatma,Tum Antaryami, Swami tum Antaryami
Par Braham Parmeshwar, Tum sabke swami,
Om jai Jagdish hare

Tum karuna ke sagar, Tum palan karta, Swami tum palan karta
Mein sevak tum swami, Kripa karo Bharta,
Om jai Jagdish hare

Tum ho ek agochar, Sab ke pranpati,Swami sab ke pranpati
Kis vidh milun Dyamaye, Tum ko main kumti,
Om jai Jagdish hare

Deen bandhu dukh harta, Tum rakshak mere,
Apne haath uthao, Dwar pada tere,
Om jai Jagdish hare

Vishay vikar mitao, Paap haro Deva,
Shradha bhakti badao, Shradha prem badao, Santan ki seva,
Om jai Jagdish hare

कैसे करें भगवान विष्णु जी  की सच्ची आरती ?

यह बात तो सब जानते ही है की संसार पंच महाभूतों—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश से बना है। आरती में ये पांच वस्तुएं (पंच महाभूत) रहते है—

  1. पृथ्वी की सुगंध—कपूर
  2. जल की मधुर धारा—घी
  3. अग्नि—दीपक की लौ
  4. वायु—लौ का हिलना
  5. आकाश—घण्टा, घण्टी, शंख, मृदंग आदि की ध्वनि

इस प्रकार सम्पूर्ण संसार से ही भगवान की आरती होती है।

मानव शरीर से भी कर सकतें है सच्ची आरती

मानव शरीर भी पंचमहाभूतों से बना है । मनुष्य अपने शरीर से भी ईश्वर की आरती कर सकता है ।

जाने कैसे ?

अपने देह का दीपक, जीवन का घी, प्राण की बाती, और आत्मा की लौ सजाकर भगवान के इशारे पर नाचना—यही सच्ची आरती है। इस तरह की सच्ची आरती करने पर संसार का बंधन छूट जाता है और जीव को भगवान के दर्शन होने लगते हैं।


सुनील कुमार

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