नवरात्रों में कलश स्थापना कैसे करें


नवरात्रि के दौरान माँ के भक्त नौ दिनो तक माँ की पूजा-अर्चना करते हैं। माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा बड़ी ही धूमधाम से की जाती है। माना जाता है कि माँ अपने भक्तों की भक्ति से खुश होकर अपने भक्तों द्वारा मांगी गई हर मनोकामनाएं पूरी करती हैं।

घट-स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त

21 सितंबर से शुरू होने वाले शारदीय नवरात्रि पर चौकी लगाने का शुभ मुहूर्त देखकर लगाया जाता है. इस वर्ष माता की चौकी लगाने का समय 21 सितंबर को सुबह 06 बजकर 03 मिनट से लेकर 08 बजकर 22 मिनट तक का है|

माता चौकी लगाने की सामाग्री

1. मिट्टी का मर्तबान

2. जौ बोने के लिए शुद्ध साफ की हुई मिट्टी जिसमें कंकर न हो

3. मिट्टी का कलश

4. रोली, मौली, सुपारी, कपूर, धूप

5. कलश में रखने के लिए सिक्का

6. आशोक या आम के पत्ते

7. फूल माला

8. दीपक

9. मिठाई

10. फल

11. इत्र

12. पंचरत्न

ऐसे करें कलश स्थापना

कलश पर सबसे पहले स्वास्तिक बनाएं

कलश पर मौली बांधे

कलश में जल भर लें

कलश में साबुत सुपारी, फूल, इत्र, पंचरत्न, और सिक्का डालें.

कलश में चावल के दाने भी डालें

नवरात्र में अखंड ज्योत का महत्व

अखंड ज्योत को जगाने से घर में हमेशा माँ दुर्गा की कृपा बनी रहती है, जरूरी नहीं कि हर घर में अखंड ज्योत जलें दरअसल अखंड ज्योत के कुछ नियम होते हैं जिन्हें नवरात्र में पालन करना होता है| हिन्दू परंम्परा है कि जिन घरों में अखंड ज्योत जलाते है उन्हें जमीन पर सोना होता है|

माता के नौ सरुपों

नवरात्रों में माता के नौ रुपों की आराधना की जाती है। माता के इन नौ रुपों को हम देवी के विभिन्न रूपों में उपासना करते है, इन्हें हम उनके तीर्थो के माध्यम से समझ सकते है।

शैलपुत्री इसका अर्थ- पहाड़ों की पुत्री होता है।
ब्रह्मचारिणी इसका अर्थ- ब्रह्मचारीणी।
चंद्रघंटा इसका अर्थ- चाँद की तरह चमकने वाली।
कूष्माण्डा इसका अर्थ- पूरा जगत उनके पैर में है।
स्कंदमाता इसका अर्थ- कार्तिक स्वामी की माता।
कात्यायनी इसका अर्थ- कात्यायन आश्रम में जन्मि।
कालरात्रि इसका अर्थ- काल का नाश करने वली।
महागौरी इसका अर्थ- सफेद रंग वाली मां।
सिद्धिदात्री इसका अर्थ- सर्व सिद्धि देने वाली।

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सुनील कुमार

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