नवरात्रों में माँ दुर्गा की मूर्ति स्थापना कैसे करें


नवरात्रि के दौरान माँ के भक्त नौ दिनो तक माँ की पूजा-अर्चना करते हैं। माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा बड़ी ही धूमधाम से की जाती है। माना जाता है कि माँ अपने भक्तों की भक्ति से खुश होकर अपने भक्तों द्वारा मांगी गई हर मनोकामनाएं पूरी करती हैं।

क्यों जरुरी हे पूजा के समय सही दिशा का होना

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माँ दुर्गा की पूजा करने के लिए दिशा का विशेष रूप से ध्यान रखा जाना चाहिए। चूंकि हर देवी-देवताओं के कुछ खास दिशाएं होती हैं. इसलिए उसी दिशा में ही पूजा-अर्चना की जानी चाहिए, जो दिशा उनके लिए निर्धारित हो। पूजा के दौरान दिशा में छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए।

माँ दुर्गा की मूर्ति स्थापना

हिन्दु मान्यता के अनुसार माँ दुर्गा का क्षेत्र दक्षिण दिशा में है| इसलिए यह बेहद जरूरी है कि माता की मूर्ति की स्थापना करते समय माता की मूर्ति का मुख पूर्व या दक्षिण दिशा की और हो. जिससे की हम जब भी पूजा करें तो उस समय हमारा मुख दक्षिण या पूर्व दिशा में ही हो क्योंकी पूर्व दिशा की ओर मुख करके माँ  का ध्यान पूजन करने से हमारी चेतना जागृत होती है जब‌क‌ि दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पूजन करने से हमें मानसिक शांति मिलती है और हमारा सीधा जुड़ाव माता से होता है|

माँ दुर्गा को कौन सा रंग पसंद है

माँ दुर्गा को तो वैसे हर एक रंग पसंद है पर कुछ एसे खाश रंग है जो माता को ज्यादा पसंद हैं। इन रंगों को उनके पूजा घर में रखना चाहिए। ये रंग हैं, हरा, गुलाबी या फिर हल्का पीला। अगर भक्त रंग पेंट नहीं करवा सकते तो इन रंगों के कागज को लगा सकते है| वहीं वास्तु के हिसाब से भी ये रंग का इस्तेमाल काफी फायदेमंद होता है। माना जाता है कि ये रंग घर में नेगेटिव एनर्जी को हटाकर पॉजिटिव एनर्जी लाते हैं।

स्वस्तिक बनाने का महत्व

हिंदु परम्परा के अनुसार किसी भी पूजा या शुभ कार्य करने से पूर्व हल्दी या सिंदूर के स्वस्तिक बनाते है. इसीलिए मां की चौकी लगाने से पहले मदिंर के दोनों तरफ स्वस्तिक अवश्य बनाएं|

माँ दुर्गा की पूजा कैसे करें

सबसे पहले जिस मूर्ति में माता दुर्गा की पूजा की जानी है। उस मूर्ति में माता दुर्गा का आवाहन करें। माता दुर्गा को आसन दें। अब माता दुर्गा को स्नान कराएं। स्नान पहले जल से फिर पंचामृत से और वापिस जल से स्नान कराएं। अब माता दुर्गा को वस्त्र अर्पित करें। वस्त्रों के बाद आभूषण पहनाएं। अब पुष्पमाला पहनाएं। सुगंधित इत्र अर्पित करें, तिलक करें। तिलक के लिए कुमकुम, अष्टगंध का प्रयोग करें।

Also Read: नवरात्रि का महत्व

अब धूप व दीप अर्पित करें। माता दुर्गा की पूजन में दूर्वा को अर्पित नहीं करें। लाल गुड़हल के फूल अर्पित करें। 11 या 21 चावल अर्पित करें। श्रद्धानुसार घी या तेल का दीपक लगाएं। आरती करें। आरती के पश्चात् परिक्रमा करें। अब नेवैद्य अर्पित करें। माता दुर्गा की आराधना के समय ‘‘ऊँ दुं दुर्गायै नमः” मंत्र का जप करते रहें।

माता दुर्गा की पूजन के पूरा होने पर नारियल का भोग जरूर लगाएं। माता दुर्गा की प्रतिमा के सामने नारियल अर्पित करें। 10-15 मिनिट के बाद नारियल को फोड़े। अब प्रसाद देवी को अर्पित कर भक्तों में बांटदे |

माता के नौ सरुपों

नवरात्रों में माता के नौ रुपों की आराधना की जाती है। माता के इन नौ रुपों को हम देवी के विभिन्न रूपों में उपासना करते है, इन्हें हम उनके तीर्थो के माध्यम से समझ सकते है।

शैलपुत्री इसका अर्थ- पहाड़ों की पुत्री होता है।
ब्रह्मचारिणी इसका अर्थ- ब्रह्मचारीणी।
चंद्रघंटा इसका अर्थ- चाँद की तरह चमकने वाली।
कूष्माण्डा इसका अर्थ- पूरा जगत उनके पैर में है।
स्कंदमाता इसका अर्थ- कार्तिक स्वामी की माता।
कात्यायनी इसका अर्थ- कात्यायन आश्रम में जन्मि।
कालरात्रि इसका अर्थ- काल का नाश करने वली।
महागौरी इसका अर्थ- सफेद रंग वाली मां।
सिद्धिदात्री इसका अर्थ- सर्व सिद्धि देने वाली।


सुनील कुमार

Back to top