माँ गंगे जी की आरती हिंदी और इंग्लिश मे {2020}


पूजा  के अंत में हम सभी देवी – देवताओं की आरती करते हैं। आरती पूजन के अन्त में हम इष्टदेवी ,इष्टदेवता की प्रसन्नता के हेतु की जाती है। इसमें इष्टदेव को दीपक दिखाने के साथ उनका स्तवन तथा गुणगान किया जाता है। यह देवी – देवताओं  के गुणों की प्रशंसा गीत है। आरती आम तौर पर एक पूजा या भजन सत्र के अंत  में किया जाता है। यह पूजा समारोह के एक भाग के रूप में गाया जाता है।

हिन्दू धर्म के अनुसार देवी गंगा स्वर्ग से ऊतर कर महादेव के सिर से होकर इस धरती पर उतरी है| देवी गंगा को माँ गंगा के नाम से भी सम्बोधित किया जाता है, देवी गंगा का जल को एक पवित्र जल माना जाता है| आज हम आपके साथ देवी गंगा जी की आरती हिन्दी तथा इंग्लिश मे साझा कर रहे है आप अपने सुविधा अनुसार कोई भी माध्यम चुन सकतें है|

माँ गंगे जी की आरती (Deity Ganga Aarti in Hindi)

ॐ जय गंगे माता, श्री गंगे माता |
जो नर तुमको ध्यावता, मनवंछित फल पाता |
ॐ जय गंगे माता

चन्द्र सी ज्योत तुम्हारी जल निर्मल आता |
शरण पड़े जो तेरी, सो नर तर जाता |
ॐ जय गंगे माता

पुत्र सगर के तारे सब जग को ज्ञाता |
कृपा दृष्टि तुम्हारी, त्रिभुवन सुख दाता |
ॐ जय गंगे माता

एक ही बार भी जो नर तेरी शरणगति आता |
यम की त्रास मिटा कर, परम गति पाता |
ॐ जय गंगे माता

आरती मात तुम्हारी जो जन नित्य गाता |
दास वही जो सहज में मुक्ति को पाता |
ॐ जय गंगे माता, श्री गंगे माता |

Deity Gange Aarti in English 

Om Jai Gange Mata, Maiya Jai Gange Mata,
Jo Nar Tumko Dhyata, Manvanchhit Phal Pata.
Om Jai Gange Mata.

Chandr Si Jyoti Tumhari, Jal Nirmal Aata,
Sharan Pade Jo Teri, So Nar Tar Jata.
Om Jai Gange Mata.

Putr Sgar Ke Tare, Sab Jag Ko Gyata,
Krupa Drishti Ho Tumhari, Tribhuvan Sukh Data,
Om Jai Gange Mata.

Ek Hi Baar Jo teri, Sharan Gati Aata,
Yam Ki Traas Mitakar, Param Gati Pata.
Om Jai Gange Mata.

Aarti Matu Tumhari, Jo Nar Nit Gata,
Dass Wahi Sahaj Mein, Mukti Ko Pata.

Om Jai Gange Mata, Maiya Jai Gange Mata.

कैसे करें माँ गंगा की सच्ची आरती ?

यह बात तो सब जानते ही है की संसार पंच महाभूतों—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश से बना है। आरती में ये पांच वस्तुएं (पंच महाभूत) रहते है—

  1. पृथ्वी की सुगंध—कपूर
  2. जल की मधुर धारा—घी
  3. अग्नि—दीपक की लौ
  4. वायु—लौ का हिलना
  5. आकाश—घण्टा, घण्टी, शंख, मृदंग आदि की ध्वनि

इस प्रकार सम्पूर्ण संसार से ही भगवान की आरती होती है।

मानव शरीर से भी कर सकतें है सच्ची आरती

मानव शरीर भी पंचमहाभूतों से बना है । मनुष्य अपने शरीर से भी ईश्वर की आरती कर सकता है ।

जाने कैसे ?

अपने देह का दीपक, जीवन का घी, प्राण की बाती, और आत्मा की लौ सजाकर भगवान के इशारे पर नाचना—यही सच्ची आरती है। इस तरह की सच्ची आरती करने पर संसार का बंधन छूट जाता है और जीव को भगवान के दर्शन होने लगते हैं।


सुनील कुमार

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