स्टीव जॉब्स के प्रेरणादायक विचार


लैपटॉप और मोबाइल फ़ोन बनाने वाली कंपनी एप्पल के भूतपूर्व सीईओ और जाने-माने अमेरिकी उद्योगपति स्टीव जॉब्स ने संघर्ष करके जीवन में फर्श से अर्श तक का मुकाम हासिल किया। स्टीव जॉब्स का जन्म 24 फरबरी 1955 में हुआ और उनकी मृत्यु 5 अक्टूबर 2011 में हुई थी| जॉब्स ने कैलिफोर्निया में ही पढ़ाई की। उस समय उनके पास ज़्यादा पैसे नहीं होते थे और वे अपनी इस आर्थिक परेशानी को दूर करने के लिए गर्मियों की छुट्टियों में काम किया करते थे। 1972 में जॉब्स ने पोर्टलैंड के रीड कॉलेज से ग्रेजुएशन की। पढ़ाई के दौरान उनको अपने दोस्त के कमरे में ज़मीन पर सोना पड़ा। वे कोक की बोतल बेचकर खाने के लिए पैसे जुटाते थे और पास ही के कृष्ण मंदिर से सप्ताह में एक बार मिलने वाला मुफ़्त भोजन भी करते थे। लेकिन आगे चलकर इसी शख्स ने कामयाबियों के शिखर छुए। स्टीव जॉब्स का भारत से भी गहरा रिश्ता था। जॉब्स ने आध्यात्मिक ज्ञान के लिए भारत की यात्रा की और बौद्ध धर्म को अपनाया। तो आइये आज जाने स्टीव जॉब्स के कुछ अनमोल विचारो के बारे में

स्टीव जॉब्स के अनमोल विचार

-> आपका समय सीमित है, इसलिए इसे किसी और की जिंदगी जी कर व्यर्थ मत कीजिये. बेकार की सोच में मत फंसिए,अपनी जिंदगी को दूसरों के हिसाब से मत चलाइए. औरों के विचारों के शोर में अपनी अंदर की आवाज़ को, अपने इन्ट्यूशन को मत डूबने दीजिए. वे पहले से ही जानते हैं की तुम सच में क्या बनना चाहते हो. बाकि सब गौड़ है.

-> आने वाले कल में कुछ नया करते है बजाए इसकी चिंता करने के, की कल क्या हुआ था।

-> यह निश्चय करना की आपको क्या नहीं करना है उतना ही महत्त्वपूर्ण है जितना की यह निश्चय करना की आप को क्या करना है।

-> यदि आपकी नज़र लाभ पर रहेगी तो आपका ध्यान उत्पाद की गुणवत्ता से हट जायेगा। लेकिन यदि आप एक अच्छा उत्पाद बनाने पर ध्यान लगाओगे तो लाभ अपने आप आपका अनुसरण करेंगा।

-> आपके चारों ओर सब-कुछ जिसे आपसे कम होनहार लोगों ने बनाया है, आप इसको जीवन कहते हैं, आप इसे बदल सकते हैं, आप इसे प्रेरित कर सकते हैं, आप खुद चीजों का निर्माण कर सकते हैं जिनका उपयोग दुसरे लोग कर सकते हैं

-> इस बात को याद रखना की मैं बहुत जल्द मर जाऊँगा मुझे अपनी ज़िन्दगी  के बड़े निर्णय लेने में सबसे ज्यादा मददगार होता है, क्योंकि जब एक बार मौत के बारे में सोचता हूँ तब सारी उम्मीद , सारा गर्व ,असफल  होने का डर सब कुछ गायब हो जाता है और सिर्फ वही बचता है जो वाकई ज़रूरी है.इस बात को याद करना की एक दिन मरना है

-> किसी चीज को खोने के डर को दूर करने का सबसे अच्छा  तरीका है.आप पहले से ही नंगे हैं.ऐसा कोई कारण नहीं है की आप अपने दिल की ना सुने

-> दिलचस्प विचारों और नयी प्रौद्योगिकी को कम्पनी में परिवर्तित करना जो सालों तक नयी खोज करती रहे , ये सब करने के लिए बहुत अनुशाशन की आवश्यकता होती है.

-> किसी ख़ास समुदाय को ध्यान में रखकर उत्पादों को डिजाइन करना बेहद मुश्किल होता है क्योंकि  बहुत से लोग नहीं जानते है की वो क्या चाहते है जब तक की आप उन्हें दिखाए नहीं.

-> यदि आप वास्तव में बहुत बारीकी से देखोगे तो आप पाओगे की रातो रात मिलने वाली अधिकतर सफलताओ में बहुत लम्बा वक़्त लगा है।

-> मुझे यकीन है कि सफल और असफल उद्यमियों में आधा फर्क तो केवल दृढ विश्वास का ही है.

-> मैं अपने जीवन को एक पेशा नहीं मानता। मैं कर्म में विश्वास रखता हूं। मैं परिस्थितियों से शिक्षा लेता हूं। यह पेशा या नौकरी नहीं है यह तो जीवन का सार है।

-> आपको अपनी सोच को साफ और सरल बनाने के लिए मेहनत करनी चाहिए। मेहनत से मिली ऐसी सोच परिणाम के लिए बड़ा मूल्य रखती है क्योंकि इसे पाकर आप पर्वत को भी हिला सकते हैं.

-> यदि आप किसी चीज़ से प्रेम नहीं करते तो आप अतिरिक्त दूर तक नहीं जायेंगे सप्ताह के अंत में अतिरिक्त कार्य नहीं करेंगे और वर्तमान स्थिति को चुनौती नहीं देंगे.

-> यदि आपकी नज़र लाभ पर रहेगी तो आपका ध्यान उत्पाद की गुणवत्ता से हट जायेगा। लेकिन यदि आप एक अच्छा उत्पाद बनाने पर ध्यान लगाओगे तो लाभ अपने आप आपका अनुसरण करेंगा.

-> किसी चीज़ को महत्तवपूर्ण होने के लिए दुनिया को बदलने की जरुरत नहीं है
सबसे महत्वपूर्ण, अपने दिल और अंतर्ज्ञान का उपयोग करने का साहस करो। वे किसी तरह पहले से ही जानते है की तुम सच में क्या बनना चाहते हो। बाकी सब गौण है.

-> कभी कभी ज़िंदगी आपके सर में पत्थर से चोट करती है। पर विश्वास मत खोना

-> आप बिन्दुओं को आगे देखते हुए नहीं मिला सकते। उन्हें केवल पीछे देखकर ही मिलाया जा सकता है। इसलिए आपको यह विश्वास करना पड़ेगा कि किसी न किसी तरह आपके जीवन-बिन्दु भी भविष्य में जरूर मिलेगें। आपको कुछ चीजों, जैसे- दृढ़ निश्चय, भाग्य, जीवन, कर्म आदि पर विश्वास करना ही पड़ेगा। यही दृष्टिकोण मुझे कभी निराश नहीं होने देता और मेरी जिन्दगी में सारे बदलाव इसी से आए हैं.

-> डीजाइन सिर्फ यह नहीं है कि चीज कैसी दिखती या महसूस होती है।  डिजाइन यह है कि चीज काम कैसे करती है.

-> जब आप समुद्री डांकू बन सकते है तो फिर नौसेना में जाने कि क्या ज़रुरत है?

-> आप ग्राहक से पूंछकर उसकी पसंद के उत्पाद नहीं बना सकते क्योंकि जब तक आप वो बनाएंगे वो कुछ नया चाहने लगेंगे।

-> कोई प्रॉब्लम आने पर पुराने लोग पूंछते है “यह क्या है” जबकि नवयुवक पूंछते है “हम इसके साथ क्या कर सकते है


सुनील कुमार

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