क्या है नवरात्रि का महत्व


आश्चिन मास के शुक्लपक्ष कि प्रतिपदा से प्रारम्भ होकर नौ दिन तक चलने वाले नवरात्र शारदीय नवरात्र कहलाते हैं। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि 21 सितंबर से शुरू होने जा रहे है, और यह 29 सितंबर तक चलेगी। इस बार नवरात्रि का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 3 मिनट से लेकर के 8 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। नवरात्रि के दौरान माँ के भक्त नौ दिनो तक माँ की पूजा-अर्चना करते हैं। माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा बड़ी ही धूमधाम से की जाती है। माना जाता है कि माँ अपने भक्तों की भक्ति से खुश होकर अपने भक्तों द्वारा मांगी गई हर मनोकामनाएं पूरी करती हैं।

नवरात्रि के पहले दिन क्या करें

वैसे तो एक साल में कुल मिलाकर चार नवरात्रि आती है जो चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ महीनें में पड़ती  है। किन्तु इन मे से चैत्र नवरात्री और आश्विन नवरात्रि का ही बहुत महत्व माना जाता है| नवरात्रि के पहले दिन कलश की स्थापना की जाती है साथ ही कलश में स्वास्तिक का चिन्ह बनाया जाता है जो कि काफी शुभ माना जाता है। इसके अलावा कलश में मौली बांध कर उसमें अक्षत का डालकर जल से उसको भर देते हैं।

माता के नौ रुपों

नवरात्रों में माता के नौ रुपों की आराधना की जाती है। माता के इन नौ रुपों को हम देवी के विभिन्न रूपों की उपासना, उनके तीर्थो के माध्यम से समझ सकते है।

शैलपुत्री – इसका अर्थ- पहाड़ों की पुत्री होता है।
ब्रह्मचारिणी – इसका अर्थ- ब्रह्मचारीणी।
चंद्रघंटा – इसका अर्थ- चाँद की तरह चमकने वाली।
कूष्माण्डा – इसका अर्थ- पूरा जगत उनके पैर में है।
स्कंदमाता – इसका अर्थ- कार्तिक स्वामी की माता।
कात्यायनी – इसका अर्थ- कात्यायन आश्रम में जन्मि।
कालरात्रि – इसका अर्थ- काल का नाश करने वली।
महागौरी – इसका अर्थ- सफेद रंग वाली मां।
सिद्धिदात्री – इसका अर्थ- सर्व सिद्धि देने वाली।

नवरात्र में व्रत का महत्व

नवरात्र के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है। मंदिरों के अलावा घरों में भी नौ देवीयो की स्थापना की जाती है। नवरात्र में भक्‍त पूरे नौ दिन तक उपवास, व्रत रखकर पूजा अर्चना करते हैं। नवरात्र पर देवी पूजन और नौ दिन के व्रत का बहुत महत्व है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की अराधना की जाती है।

वैज्ञानिक आधार

नवरात्र के पीछे का वैज्ञानिक आधार यह है कि पृथ्वी द्वारा सूर्य की परिक्रमा काल में एक साल की चार संधियां हैं जिनमें से मार्च व सितंबर माह में पड़ने वाली गोल संधियों में साल के दो मुख्य नवरात्र पड़ते हैं। इस समय रोगाणु आक्रमण की सर्वाधिक संभावना होती है। ऋतु संधियों में अक्सर शारीरिक बीमारियां बढ़ती हैं। अत: उस समय स्वस्थ रहने के लिए तथा शरीर को शुद्ध रखने के लिए और तन-मन को निर्मल और पूर्णत: स्वस्थ रखने के लिए की जाने वाली प्रक्रिया का नाम ‘नवरात्र’ है।

शारदीय नवरात्रि  की तिथियाँ

नवरात्रि  दिन तिथियाँ देवी
प्रथम नवरात्रि (प्रतिपदा) वृहस्पतिवार 21 सितंबर 2017 शैलपुत्री स्वरूप की पूजा
दूसरा नवरात्रि शुक्रवार 22 सितंबर 2017 देवी ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा
तृतीय नवरात्रि शनिवार 23 सितंबर 2017 चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा
चतुर्थ नवरात्रि रविवार 24 सितंबर 2017 कुष्मांडा स्वरूप की पूजा
पंचमी नवरात्रि सोमवार 25 सितंबर 2017 स्कंदमाता की पूजा
षष्ठी नवरात्रि मंगलवार 26 सितंबर 2017 कात्यायनी स्वरूप की पूजा
सप्तमी नवरात्रि बुधवार 27 सितंबर 2017 कालरात्रि स्वरूप की पूजा 
अष्टमी नवरात्रि वृहस्पतिवार 28 सितंबर 2017 महागौरी स्वरूप की पूजा
नवमी नवरात्रि शुक्रवार 29 सितंबर 2017 सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा

सुनील कुमार

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