चेचक होने पर क्या करें


चेचक (शीतला, बड़ी माता, small pox) यह रोग अत्यंत प्राचीन है। आयुर्वेद के ग्रंथों में इसका वर्णन मिलता है। यह रोग केवल मनुष्यों में होता है| चिकन पॉक्स वायरस से फैलने वाली एक संक्रमक बीमारी है। 1 वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक के बच्चों में चिकन पॉक्स का खतरा सबसे ज्यादा होता है। इस बीमारी में पूरे शरीर में लाल दाने निकलने के साथ ही कमजोरी और खुजली भी होती है।

विज्ञान के मुताबिक

डॉक्टरों के मुताबित इसके लिए दो विषाणु उत्तरदायी माने जाते है वायरोला मेजर और वायरोला माइनर,  इस रोग के विषाणु त्वचा की लघु रक्त वाहिका, मुंह, गले में असर दिखाते है, मेजर विषाणु ज्यादा मारक होता है, इसकी म्रत्यु दर ३०-३५% रहती है, इसके चलते ही चेहरे पर दाग, अंधापन जैसी समस्या पैदा होती रही है, माइनर विषाणु से मौत बहुत कम होती है |

धार्मिक मान्यताओ के मुताबिक

चेचक को खासकर शीतला माता से जोड़ा जाता है| शीतला माता को मां दुर्गा का रूप माना जाता है, ऐसा कहते हैं कि उनकी पूजा करने से चेचक, फोड़े-फूंसी और घाव ठीक हो जाते हैं| दरअसल, शीतला का अर्थ होता है ठंडक चेचक होने पर बॉडी में काफी जलन होती है और उस वक्त सिर्फ बॉडी को ठंडक चाहिए होती है, इसलिए कहा जाता है कि शीतला माता की पूजा करने से वो खुश हो जाती हैं, जिससे मरीज की बॉडी को ठंडक पहुंचती है|chicken pox

दरअसल, 90 के दशक तक चिकन पॉक्स के इंजेक्शन नहीं मौजूद थे. इस कारण विद्वानों ने इस बीमारी के कुछ घरेलू उपाय बताए थे, जिसे भगवान से जोड़ दिया जाता है. दरअसल, इस बीमारी के इलाज के लिए किसी तरह की कोई दवाई नहीं है, इसलिए इसमें सिर्फ आराम के लिए कुछ एंटी वायरल दवाइयां ही दी जाती हैं. इसके अलावा नीम की पत्तियों को घर के बाहर रखा जाता है, जिससे कीड़े-मकौड़े घर में नहीं आएं|

चेचक होने के लक्षण

चेचक के वायरस के संक्रमण होने के 10 से 21 दिनों बाद बच्चों में इसके लक्षण दिखना शुरू होते हैं।

चेचक  के लक्षण इस प्रकार हैं :

शरीर पर खुजली के साथ लाल दाग और फोड़े-फुंसी हो जाते हैं। शुरुआत में फुंसी छोटी होती है, और फिर उसमे तरल पदार्थ जमा होकर फफोले तैयार हो जाते हैं।
मुंह के अंदर, सिर पर, आँखों के पास और जनेन्द्रिय के ऊपर भी छाले/फुंसी आ सकते हैं।
बुखार
थकान / कमजोरी
मांसपेशी में दर्द
सर्दी, जुखाम, नाक बहना
हल्की खांसी
संक्रमण फेफड़ों में फैलने पर खांसी, सांस लेने में तकलीफ और सिने में दर्द भी होता हैं।

चेचक होने पर क्या खाए पिए

चेचक होने पर कुछ ऐसे आहार बताए जा रहे हैं जिन्हें चिकन पॉक्स में लेने से आप जल्दी ठीक होते हैं। इस बीमारी में कॉर्बोहाईड्रेट युक्त आहार का अधिक सेवन करना चाहिए। ये शरीर में कैलोरी को बढ़ाते हैं। इसके लिए चावल, दलिया, ओट्स, आलू और केले खाएं। इस बीमारी के चलते हमारे शरीर को विटामिन ए और सी की बहुत जरूरत होती है। इसके लिए नींबू, संतरा, पपीता, तरबूत, गाजर, खीरे, टमाटर और स्प्राउट्स बहुत फायदेमंद हैं। प्रोबायोटिक्स आहार शरीर में अच्छे बैक्टीरिया पैदा करते हैं जो इंफेक्शन को मारते हैं। इसलिए अगर आप या आपके पहचान में कोई चिकन पॉक्स की बीमारी से पीड़ित है तो उन्हें ये आहार लेने की सलह दें।

चेचक होने पर क्या करें

नीम की पत्तियों को नहाने के पानी में डुबोकर उस पानी से नहलाने से लाभ होता हैं। निम के एंटी वायरल गुण के कारण संक्रमण को अधिक फैलने से रोकने में मदद होती हैं।
खुजली से राहत देने के लिए उनके नहाने के पानी में हल्का बेकिंग सोडा डालें। बच्चों का कमरा ठंडा रखे और उन्हें टाइट गर्म कपड़ो की जगह ढीले सूती कपडे पहनाए।
बच्चों में खुजली की समस्या अधिक होने पर उन्हें डॉक्टर की सलाह से दवा दे। बच्चों के नाख़ून बढे हुए है तो उन्हें काटे और साफ़ रखे। खुजली करते समय नाख़ून का मैल फोड़े-फुंसी में जाने से संक्रमण होकर फोड़े-फुंसी पकने का खतरा रहता हैं। छोटे बच्चों में हाथों पर हैंड सॉक्स पहना देना चाहिए।
अगर बच्चों को गले में दर्द होता है तो गुनगुने पानी में नमक डालकर गरारे करने से लाभ होता हैं।
बच्चों के शरीर में पानी की कमी न हो इसके लिए उन्हें पानी, तरल पदार्थ अधिक प्रमाण में देना चाहिए।
बच्चों को चेचक होने पर पूरी तरह से ठीक होने तक घर के बाहर खेलने या स्कूल में नहीं भेजना चाहिए। इससे संक्रमण फैलने का खतरा रहता हैं।
चेचक पीड़ित व्यक्ति के कपडे, बिस्तर, थाली, ग्लास इत्यादि गर्म पानी से धोकर साफ़ करने चाहिए।
घर में अगर कोई गर्भवती महिला है जिसे पहले कभी चेचक नहीं हुआ है तो उन्होंने चेचक पीड़ित व्यक्ति से दूर रहना चाहिए।

चेचक अगर बचपन में हो जाये तो ठीक है क्योंकि बाद में होने पर यह अधिक पीड़ादायक होता हैं। चेचक होने पर अगर बच्चे को अधिक बुखार आता है या बच्चा ज्यादा कमजोर नजर आता है तो घरेलु नुस्खे आजमाने की जगह तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

हम उम्मीद करते है, कि आप सभी ने हमारे लिखी हुई पोस्ट पूरे ध्यान से और पूरी पढ़ी होगी, अगर नहीं पढ़ी हो तो एक बार पहले पोस्ट पढ़ें, और अगर फिर आपको कहीं लगे कि इस रोग में यह बात ऐसे नहीं ऐसे होनी चाहिए थी या इस का और भी कोई इलाज या तरीका हे तो कृपया कमेंट के माध्यम से हमें बताएं धन्यवाद।


सुनील कुमार

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