अंतिम संस्कार के बाद स्नान क्यों जरूरी है


जन्म और मृत्यु प्रकृति के अटल सत्यों में सबसे प्रमुख है। जिस किसी व्यक्ति ने इस धरती पर जन्म लिया है उस व्यक्ति की मृत्यु भी तय है। गीता में श्री कृष्ण ने कहा है कि आत्मा अमर है, वह सिर्फ पुराना शरीर छोड़कर नया शरीर धारण करती है, आत्मा का ना आदि है और ना ही अंत। आत्मा तो शरीर का साथ छोड़कर अपने परम पिता के पास चली जाती है, पीछे रह जाता है तो यह नश्वर शरीर। इस नश्वर शरीर को भी पंच तत्वों में विलीन कर दिया जाता है। हिन्दू धर्म में शव को श्मशान भूमि में जाकर अग्नि को समर्पित करने का विधान है।

जब किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो उसका दाह संस्कार विधिवत रूप से किया जाता है| लगभग सभी धर्मों में ऐसा माना जाता है की शवयात्रा में जाना और मृत शरीर को कंधा देना बड़े ही पुण्य कार्य है| हिन्दू  धर्म शास्त्रों के अनुसार शवयात्रा में शामिल होने और किसी के अंतिम संस्कार में उपस्थित रहने से इंसान को जिंदगी की सच्चाई का आभास होता है| और वह यह सोचता है की मनुष्य के सफ़र का अंत यही पर होता है| फिर भी सभी लोग अपनी पूरी जिन्दगी में और पैसा कैसे कमाऊ अपना घर, अपने कपडे, अपने बच्चे करता रहता है| लेकिन कभी इस बारे में नहीं सोचता है की उसे भी एक दिन यही आन है और अपने साथ कुछ नहीं ले के जाना है हाँ व्यक्ति के जाने के बाद उसके द्वारा किए गए अछे और बुरे कर्मो को जरुर याद किया जाता है| कई लोगो ने अपने मन में यह भी सोचते होंगे कि जब शमशान जाने से आध्यात्मिक लाभ हैं| तो शमशान से वापस आकर तुरंत नहाना क्यों जरुरी है| तो आइए जानते हैं इस परंपरा के धार्मिक और वैज्ञानिक कारणों कोtake bath after the funeral

धार्मिक कारण

श्मशान भूमि पर लगातार ऐसा ही कार्य होते रहने से एक प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बन जाता है जो कमजोर मनोबल के इंसान को हानि पहुंचा सकता है,क्योंकि स्त्रियां अपेक्षाकृत पुरुषों के, ज्यादा भावुक होती हैं, इसलिए उन्हें श्मशान भूमि पर जाने से रोका जाता है। दाह संस्कार के बाद भी मृतआत्मा का सूक्ष्म शरीर कुछ समय तक वहां उपस्थित होता है, जो अपनी प्रकृति के अनुसार कोई हानिकारक प्रभाव भी डाल सकता है।

वैज्ञानिक कारण

शव का अंतिम संस्कार होने से पहले ही वातावरण सूक्ष्म और संक्रामक कीटाणुओं से ग्रसित हो जाता है। इसके अलावा मृत व्यक्ति भी किसी संक्रामक रोग से ग्रसित हो सकता है। इसलिए वहां पर उपस्थित इंसानों पर किसी संक्रामक रोग का असर होने की संभावना रहती है। जबकि नहा लेने से संक्रामक कीटाणु आदि पानी के साथ ही बह जाते हैं।


सुनील कुमार

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